शिक्षकों ने टीईटी मुक्ति व पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सौंपा ज्ञापन

लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आवाह्न पर प्रान्तीय तदर्थ समिति प्राथमिक शिक्षक संघ उत्तराखंड द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को सेवा में बने रहने व पदोन्नति हेतु टीईटी की अनिवार्यता के विरुद्ध प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों द्वारा 22 जून को राजधानी में हुंकार रैली के माध्यम से सचिवालय कूच कर अपने इरादे जाहिर कर सरकार को स्पष्ट संकेत दे दिया है, 2017 में आरटीआई अधिनियम में संशोधन कर इसे सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य करने वाले काले कानून को वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा जारी आगे के चरणवद्ध आंदोलन के तहत आज उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद शाखा रूद्रप्रयाग के द्वारा बाबा केदारनाथ की पवित्र देव भूमि से शुरूआत करते हुए केदारनाथ विधायक केदारनाथ श्रीमती आशा नौटियाल को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि आरटीआई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक जो कि समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा एनसीटीई के निर्धारित मानकों /योग्यताओं के आधार पर नियुक्त हुए हैं, उन्हें अब दशकों की सेवा के बाद सेवा में बने रहने व पदोन्नति हेतु अध्यापक पात्रता परीक्षा देने की बाध्यता का फरमान जारी किया गया है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश का होना लाजिमी है। प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद रूद्रप्रयाग के अध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने कहा कि आरटीई अधिनियम 2010 लागू होने के बाद अध्यापक पात्रता परीक्षा का प्राविधान शिक्षकों की नियुक्ति के लिए लागू किया गया था। न कि सेवा में बने रहने व पदोन्नति के लिए। किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए समय-समय पर नियम बदलते रहते हैं, लेकिन कोई भी नियम जब बनता है या पास होता है तो उसके बाद ही वह लागू होता है। पूर्व से नियुक्त वालों पर वह कभी भी लागू नहीं होता है। मात्र शिक्षकों के लिए ऐसा काला कानून क्यों। सेवा में बने रहने व पदोन्नति के लिए आज भी कोई पात्रता परीक्षा का प्राविधान किसी भी सरकारी सेवाओं में नहीं है। ज्ञापन के माध्यम से केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल से निवेदन किया गया कि,आरटीई अधिनियम 2010 के लागू होने से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने के लिए भारत सरकार से अधिनियम में पुख्ता संसोधन करने हेतु अपने ओर से शिक्षा मंत्री भारत सरकार को पत्र प्रेषित करने की मांग की गई है। वहीं दूसरी ओर अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों व कार्मिकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और उत्तराखंड राज्य में 2005 से पूर्व की विज्ञप्ति के आधार पर 01 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त शिक्षक को अन्य जनपदों की भांति पूरे प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाय। नवीन पेंशन योजना जो कि शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ धोखा है, को वापस लेते हुए, बुढ़ापे में शिक्षकों और कर्मचारियों के आर्थिक व सामाजिक जीवन को सुरक्षित रखने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग प्रमुखता से की गई। ज्ञापन देने में विक्रम सिंह झिंक्वाण, दिनेश चंद्र भट्ट,रधुबीर बुटोला, कैलाश मैठाणी, राजेन्द्र लाल शाह, देवेन्द्र वजवाल, दीर्घायु प्रसाद आदि उपस्थित थे।



