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तिलवाड़ा में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर भेदभाव के आरोप, डीएम ने दिए सख्त निर्देश, निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा

स्थानीय लोगों में उबाल,,

डीएम ने दिए सख्त निर्देश, निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ हाइवे के तिलवाड़ा में चल रही अतिक्रमण हटाओ मुहिम अब विवादों के घेरे में है। बुलडोजर की कार्रवाई भले ही तेज दिख रही हो, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष नहीं है। रसूखदारों और सत्ताधारी नेताओं से पहचान रखने वालों के अतिक्रमण सुरक्षित हैं, जबकि गरीब और सामान्य लोगों पर सख्ती दिखाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई वर्षों से कुछ लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जा जमा रखा है। यहां तक कि सरकारी मुआवजा लेने के बाद भी दोबारा अतिक्रमण कर लिया गया, लेकिन विभागीय अभियंताओं और प्रशासन ने आंखें मूंद लीं। वहीं जिन लोगों की कोई राजनीतिक या विभागीय पहुंच नहीं है, उनके खिलाफ बुलडोजर बेरोकटोक चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, तथाकथित जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारी पार्टी नेताओं की आड़ में अतिक्रमण को संरक्षण दिया जा रहा है। आरोप है कि एनएच खंड और तहसील प्रशासन के कुछ अधिकारी भी इस मिलीभगत में शामिल हैं। पिछले दो-तीन वर्षों में कई जिलाधिकारी और एनएच के अधिशासी अभियंता बदले, लेकिन कार्रवाई का पैटर्न नहीं बदला। हर बार दबाव की चर्चा सामने आती रही है।
नवनियुक्त जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने हाल ही में तिलवाड़ा में अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर भेदभाव के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाना है तो सभी पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए, न कि पहचान और प्रभाव के आधार पर।
क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो यह नाराजगी कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

वहीं, मामले में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि तिलवाड़ा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। कुछ लोगों ने स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। इसके बावजूद यदि निर्धारित समय में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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