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केदारघाटी में लोक पर्व फूलदेई का हुआ शुभारंभ 

केदारघाटी में लोक पर्व फूलदेई का हुआ शुभारंभ

केदारघाटी। चैत्र की संक्रांति से लोकपर्व फूलदेई का शुभारंभ हो गया है। फूलदेई के आगमन पर ही मौसम ने अपना रुख बदला, वहीं तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। जहां ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हुई वहीं निचले इलाकों में शीतलहर के चलने से तापमान में भारी गिरावट महसूस की गई।

बता दें, केदारघाटी के गांवों में रविवार को प्रातः गांव में बच्चे जय घोघा राजा फ़्यूलिया फूल का जयकार लगाते हुए प्राकृतिक पुष्प बुरांश, फ़्यूली, आडू, सहित अनेक प्रजाति के पुष्प पतियों को गांव में ग्रामीणों की चौखट पर डालते हैं। जिस से ग्रामीण बच्चों को उपहार के रूप में गुड, चना एवं अन्य सामग्री देते हैं। यह परंपरा पहाड़ों में सदियों पूर्व से चली आ रही है गांवों में बच्चे प्रातः अपने घरों से पंचायती चौक में एकत्र होकर घोघा राजा जिसे एक दिन पूर्व सजा कर तैयार किया जाता है ,पूरे गांव में भ्रमण करते हैं।

उत्तराखंड में फूलदेई लोकपर्व को बाल पर्व के रूप में मनाया जाता है ,यह चैत्र की संक्रांति से शुरू होता है आठ दिनों तक चलने वाला यह पर्व आठवें दिन घोघा राजा की पूजा तत्पश्चात भोज के बाद इसका समापन किया जाता है।
कहते हैं बसंत ऋतु में नव ऊर्जा का संचार होता है, जिस से बच्चों को प्रातः जल्दी उठते ही गांव में नंगे पैर भ्रमण करना पड़ता है।

बाल पर्व फूल देई का उत्साह केदारघाटी के सीमांत गांव त्रियुगीनारायण, तोषी, न्यालसू, शेरसी, बड़ासू, जामू, रविग्राम, खड़िया, खाट सहित मैखंडा गांवों में दिखाई दिया , इसके साथ ही जनपद के प्रत्येक गांवों में बच्चे इस दिन प्रातः फूल देई के गीतों को गाकर गांव में भ्रमण करते हैं।

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