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पर्यावरण संरक्षण को लेकर कनकचौरी से स्कन्द नगरी पैदल मार्ग पर रोपित पौधे गायब, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल 

लक्ष्मण सिंह नेगी

ऊखीमठ। पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर चलाए जाने वाले पौधरोपण अभियानों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वन विभाग अगस्त्यमुनि रेंज द्वारा विगत वर्ष कनकचौरी से स्कन्द नगरी तक पैदल मार्ग के किनारे रोपित किए गए अधिकांश पौधे देखरेख के अभाव में गायब हो गए हैं। स्थिति यह है कि जिन स्थानों पर पौधरोपण किया गया था, वहां अब पौधों का नामोनिशान तक दिखाई नहीं दे रहा है। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। स्थानीय नागरिकों एवं तीर्थयात्रियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बड़े उत्साह के साथ पौधरोपण अभियान चलाया गया था। उस समय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा का दावा भी किया गया था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद अधिकांश पौधे सूख गए अथवा नष्ट हो गए। कई स्थानों पर पौधों के लिए बनाए गए गड्ढे और सुरक्षा व्यवस्थाएं भी गायब हो चुकी हैं।
स्थानीय जनता का आरोप है कि पैदल मार्ग के किनारे जहां पौधे लगाए गए थे, वहां एक स्थान पर कुछ दुकानदारों ने अतिक्रमण कर अपने अस्थायी ढांचे एवं अन्य सामग्री रख दी है। इससे पौधरोपण के लिए चयनित भूमि का स्वरूप ही बदल गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा निगरानी की जाती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। पर्यावरणविदो ने वन विभाग पर पौधरोपण को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा, सिंचाई और नियमित देखरेख के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य अधूरा रह गया और सरकारी धन का भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।
कनकचौरी और स्कन्द नगरी क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में हरित क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का धरातल पर सफल होना आवश्यक है। लेकिन पौधों के गायब होने से विभागीय दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। तल्लानागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता पंचम सिंह नेगी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि पौधरोपण अभियान पर खर्च की गई धनराशि, लगाए गए पौधों की संख्या तथा उनकी वर्तमान स्थिति का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाना चाहिए। साथ ही अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए। केदार घाटी के सामाजिक कार्यकर्ता एल एस नेगी ने वन विभाग से पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर पौधरोपण स्थलों की पुनः पहचान करने, नए पौधे लगाने तथा उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। अन्यथा पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चलाए जाने वाले अभियान केवल कागजी आंकड़ों तक ही सीमित रह जाएंगे। वहीं दूसरी ओर इस मामले में रेंज अधिकारी अगस्त्यमुनि हरि शंकर रावत से जानकारी जाननी चाही मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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