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आभूषणों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल, ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ का बड़ा खुलासा

‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ का बड़ा खुलासा।
बांग्लादेश का पीतल सोने के नाम पर बेचने का आरोप, सराफा बाजार में मिलावट का खतरनाक खेल।

रुद्रप्रयाग जिले के सराफा बाजार में इन दिनों आभूषणों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ कारोबारी असली सोने और चांदी के नाम पर मिलावटी धातु बेचकर ग्राहकों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक चर्चा है कि सस्ती धातु या पीतल को सोने की परत चढ़ाकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

चांदी में ‘सिल्वर’ का खेल, सोने पर तांबे की परत!

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, गुप्तकाशी, ऊखीमठ, जखोली और आसपास के क्षेत्रों में शुद्धता की अनदेखी कर ग्राहकों के विश्वास को तोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि—
चांदी में सस्ती धातुएं मिलाकर गुणवत्ता घटाई जा रही है।
तांबे या अन्य धातु पर सोने की परत चढ़ाकर उसे असली सोना बताकर बेचा जा रहा है।
वजन पूरा दिया जा रहा है, लेकिन शुद्धता कम पाई जा रही है।
कुछ आभूषण समय के साथ काले पड़ रहे हैं या एलर्जी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
हॉलमार्क और BIS की अनदेखी?
विशेषज्ञों के अनुसार असली चांदी पर 925 अंकित होता है, जिसका अर्थ है कि उसमें 92.5% शुद्ध चांदी है। वहीं सोने के आभूषण 18, 20 या 22 कैरेट हॉलमार्क के साथ आते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क आभूषण की शुद्धता की सरकारी गारंटी माना जाता है। बिना हॉलमार्क के आभूषण खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

चांदी में कैसे होती है मिलावट?
चांदी में मजबूती और चमक बनाए रखने के लिए एलॉय मिलाना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन यदि निकृष्ट या अत्यधिक सस्ती धातुएं मिलाई जाएं, तो—

चमक तो बनी रहती है
लेकिन शुद्धता कम हो जाती है
कीमत असली जैसी ही वसूली जाती है।

सोने में तांबे का खेल कैसे?
सूत्रों के अनुसार कुछ मामलों में तांबे या अन्य सस्ती धातु पर सोने की पतली परत चढ़ाकर उसे असली सोने के रूप में बेचा जाता है। बाहर से चमकदार दिखने वाला आभूषण भीतर से कम मूल्य का हो सकता है।

रासायनिक प्रक्रियाओं से तांबे को सुनहरा रंग देना संभव है, लेकिन यदि यही तकनीक ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए इस्तेमाल हो, तो यह सीधी-सीधी धोखाधड़ी मानी जाएगी।

प्रशासन और निगरानी विभागों पर सवाल?
ग्राहकों का कहना है कि सराफा दुकानों की नियमित जांच, सैंपल टेस्टिंग और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यदि समय-समय पर जांच अभियान चलें, तो मिलावटखोरी पर लगाम लग सकती है।

असली-नकली की पहचान कैसे करें?
✔ केवल हॉलमार्क युक्त आभूषण खरीदें
✔ 925, 18K, 22K जैसे अंकन अवश्य देखें
✔ खरीद का पक्का बिल और शुद्धता प्रमाणपत्र लें
✔ अत्यधिक सस्ती कीमत से सावधान रहें
✔ संदेह होने पर अधिकृत जांच केंद्र में परीक्षण कराएं
✔ चुंबक परीक्षण करें — चांदी चुंबकीय नहीं होती।

विश्वास पर चोट का मामला–
सोना-चांदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि लोगों की मेहनत की कमाई और विश्वास का प्रतीक है। यदि मिलावट और फर्जीवाड़ा सच साबित होता है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक भरोसे पर सीधा हमला है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ पर कब और कितनी सख्ती दिखाता है।
सतर्क रहें, जागरूक बनें — क्योंकि चमक के पीछे सच्चाई छिपी भी हो सकती है।

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