अघोषित विद्युत कटौती से केदारघाटी की जनता त्रस्त, विभाग बना बेपरवाह

लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। केदार घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में अघोषित विद्युत कटौती होने से उपभोक्ताओं में आक्रोश बना हुआ है। विगत कई दिनों से हो रही अघोषित विद्युत कटौती से सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने के साथ विद्युत व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों का व्यवसाय खासा प्रभावित हो रहा है तथा बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे नौनिहालों को मोमबत्ती के सहारे पठन – पाठन करना पढ़ रहा है। विद्युत विभाग की उदासीनता के कारण हर 10 मिनट में कटौती होना आम बात हो गई है।
बता दे कि केदार घाटी में विगत कई महीनों से अघोषित विद्युत कटौती जारी है। इन दिनों सीमान्त गांवों के ग्रामीण अपने नौनिहालों के आधार कार्ड लिंक करवाने के लिए मीलों दूरी तय करने के बाद तहसील मुख्यालय तो पहुंच रहे हैं मगर दिन भर विद्युत कटौती होने से ग्रामीणों को वैरंग लौटना पड़ रहा है। अघोषित विद्युत कटौती होने से सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने के साथ – साथ विधुत व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों का कारोबार खासा प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश महामंत्री आनन्द सिंह रावत का कहना है कि ऊर्जा प्रदेश में अघोषित विधुत कटौती होना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केन्द्र व प्रदेश सरकार पहाड़ के पानी व पहाड़ की जवानी को बढ़ावा देने का ढिंढोरा पीट रही है वही केदार घाटी में विभिन्न जल विद्युत परियोजना के निर्माण के बाद भी अघोषित विद्युत कटौती निरन्तर जारी है। उनका कहना है कि अघोषित विद्युत कटौती से नौनिहालों का पठन – पाठन खासा प्रभावित हो रहा है तथा आने वाले समय में यदि अघोषित विधुत कटौती जारी रहती है तो आगामी 27 फरवरी से शुरू होने वाले बोर्ड परीक्षाओं में शामिल नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने की सम्भावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। केदारघाटी होटल एसोशिएसन के उपाध्यक्ष प्रमोद नौटियाल ने बताया कि केदारघाटी में इन दिनों व्यवसायिक निर्माण कार्य चल रहे हैं, परन्तु विद्युत विभाग की अघोषित कटौती से निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। प्रधान मक्कू विजयपाल नेगी का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को बार – बार अवगत कराने के बाद भी अघोषित विद्युत कटौती जारी रहने से स्पष्ट हो गया है कि विद्युत विभाग अपने कर्तव्यों व उपभोक्ताओं के प्रति उदासीन बना हुआ है।



