
लक्ष्मण सिंह नेगी।
उखीमठ। तुंगनाथ घाटी के पर्यटक स्थलों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने को लेकर वन विभाग की इको टूरिज्म जोन माइक्रोप्लान पर ग्रामीणों की आम सहमति नहीं बन पा रही है।
इसी को लेकर वन पंचायत मक्कूमठ एवं वन पंचायत उषाडा के वन पंचायत सरपंचों ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने वन विभाग पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि उप जिलाधिकारी ऊखीमठ ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और प्रकरण की जांच की बात कही है। वन पंचायत मक्कूमठ के वन पंचायत सरपंच विजयपाल सिंह चौहान ने कहा कि बीते 7 फरवरी को तहसील प्रशासन की मौजूदगी में वन विभाग की ओर से मक्कू एव उषाड़ा में खुली बैठक की गई थी, वन विभाग की ओर से माइक्रोप्लान, टेंटों के नवीकरण सहित अन्य गतिविधियों पर चर्चा की जानी थी लेकिन बैठक में दोनों गांव के सभी ग्रामीण उपस्थित नहीं हो पाए थे इस पर रूद्रप्रयाग वन प्रभाव के डीएफओ अभिमन्यु सिंह ने 15 फरवरी को दोबारा बैठक करने की बात कही, मगर 8 फरवरी को रेंजर द्वारा फोन पर बताया गया कि बनियाकुंड के पंगेर में उनकी ओर से जो भी गतिविधियां संचालित की जा रही है उन्हें दो दिन में खाली करें, अन्यथा विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
वही, वन पंचायत सरपंच उषाडा देवेंद्र सिंह बजवाल ने कहा कि विभाग की ओर से बनियाकुंड दुग्गलबिट्टा, पंगेर आदि स्थानों पर व्यवसाय कर रहे ग्रामीणों को विश्वास में लिए बिना दूरभाष और मौखिक रूप से दबाव बनाया जा रहा है। इसीलिए उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इधर, उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि अभी सरपंचों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है, प्रशासनिक स्तर पर जांच की जाएगी कहीं दबाव में इस्तीफा तो नहीं दिया जा रहा है।



