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तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले

ग्रीष्मकाल के लिये खुले तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट
रुद्रप्रयाग। पंच केदारों में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिये आज बुधवार 26 अप्रैल को वैदिक विधि-विधान के साथ खोल दिये गये है। तुंगनाथ मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मौजूद रहे। तुंगनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही तुंगनाथघाटी हर हर महादेव के नारों से गूंज उठी। अब 6 महीनों के लिए श्रद्धालु यहां बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
बता दें, कपाट खुलने से पहले बाबा तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली रात्रि प्रवास के लिए भूतनाथ मन्दिर पहुंची थी। 25 अप्रैल को भूतनाथ मन्दिर से रवाना होकर तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली पाव, चिलियाखोड, पंगेर बनियाकुंड यात्रा पड़ावों से होते हुए अन्तिम रात्रि प्रवास चोपता पहुंची. जिसके बाद आज 26 अप्रैल को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के तुंगनाथ धाम पहुंची। बाबा की डोली के धाम पहुंचने के मौके पर भजन और मांगल गीतों से डोली का स्वागत किया गया। इसके बाद वेद ऋचाओं और वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ बाबा तुंगनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिये गये हैं।
बता दें तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है। तुंगनाथ मंदिर सत्य तारा पर्वत पर स्थित है. कहा जाता है कि यहां सप्त ऋषियों और तारागणों ने शिव पार्वती की तपस्या कर ऊंचाई पर रहने का वरदान प्राप्त किया था.तुंगनाथ से कई पर्वतों की चोटियों के दर्शन होते हैं। तुंगनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में आता है। यह ऊखीमठ से 28 किमी दूर है।

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