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तुंगनाथ घाटी में गौवंश संरक्षण को लेकर टीम का गठन, मिनी स्विटजरलैंड चोपता में ठंड से हो रही गौवंश की मौत

मिनी स्विटजरलैंड चोपता में मवेशियों का उपयोग करने के बाद बुग्यालों में छोड़ रहे असामाजिक लोग
गौ रक्षा विभाग ने तुंगनाथ घाटी में गौवंश संरक्षण को लेकर टीम का किया गठन,
निराश्रित गाय और नंदी का होगा संरक्षण, बनाया जायेगा गौ धाम,

रुद्रप्रयाग। तुंगनाथ घाटी में गाय और नंदी के संरक्षण को लेकर विश्व अखाड़ा परिषद (गौ रक्षा विभाग) ने  टीम का गठन कर जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस दौरान गौ भक्तों ने संकल्प लिया कि जल्द ही गौ रक्षा धाम के निर्माण को लेकर भूमि का चयन कर आगे की कार्यवाही की जाएगी। वहीं, निराश्रित सड़कों में घूम रहे पशुओं को हरा चारा देने के साथ ही इनका ट्रीटमेंट भी किया जाएगा। इस मौके पर मिनी स्विटजरलैंड चोपता में ठंड के कारण हो रही मवेशियों की मौत पर दुख प्रकट किया गया और ऐसे असामाजिक लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की मांग की गई।

तुंगनाथ घाटी के मस्तूरा में आयोजित विश्व अखाड़ा परिषद (गौ रक्षा विभाग) की बैठक में प्रधान उषाड़ा कुंवर सिंह बजवाल को घाटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई, जबकि युवा मुकेश नेगी को महामंत्री चुना गया। इसके अलावा कोषाध्यक्ष दिलबर सिंह नेगी, सचिव नंदन सिंह रावत, उपाध्यक्ष पुष्कर सिंह पटवाल मीडिया प्रभारी गजवाल सिंह भट्ट, प्रचार-प्रसार मंत्री का दायित्व मुरली सिंह नेगी, वंदना देवी, महावीर सिंह नेगी, वीरेन्द्र सिंह नेगी, मनोरमा देवी को सौंपी गई है। गौ रक्षा विभाग के जिलाध्यक्ष रोहित डिमरी ने कहा कि गौ वंश के संरक्षण और संवर्द्धन को लेकर विश्व अखाड़ा परिषद का गौ रक्षा विभाग कार्य कर रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि सड़कों में निराश्रित घूम रही गाय और नंदी का संरक्षण किया जाए और इनके लिए गौ धाम का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग के सहयोग से घायल गाय और नंदी का ट्रीटमेंट किया जा रहा है, जबकि किसी गौवंश की मृत होने पर नगर पालिका के सहयोग से इन्हें उठाने के साथ ही दफनाने की प्रक्रिया की जाती है। उन्होंने कहा कि तुंगनाथ घाटी में गाय और नंदी का संरक्षण किया जाना जरूरी है। क्षेत्र के असामाजिक लोग अपने मवेशियों को सड़कों में छोड़ रहे हैं, जिनसे इनकी मौत हो रही है। इनके संरक्षण को लेकर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होती है, जबकि साक्षात शिव की भूमि केदारनाथ धाम में नंदी की पूजा की जाती है। ऐसे में गाय और नंदी का संरक्षण व संवर्द्धन किया जाना जरूरी है।
सचिव देवेन्द्र बिष्ट ने कहा कि गाय हमारी माता है। गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा तभी मिल पायेगा, जब हम सभी मिलकर इनके संरक्षण और संवर्द्धन को लेकर कार्य करें। तुंगनाथ घाटी के चोपता के बुग्यालों में असामाजिक लोग अपने मवेशियों को छोड़ रहे हैं, जिस कारण इनकी मौत हो रही है। जो लोग ऐसा कृत्य कर रहे हैं, वे पाप के भागी बन रहे हैं। ऐसे में इन असामाजिक लोगों को जागरूक करने के साथ ही निराश्रित पशुओं के संरक्षण को लेकर कार्य किया जाना जरूरी है।
बैठक में प्रधान उषाड़ा एवं गौ रक्षा विभाग तुंगनाथ घाटी के अध्यक्ष कुंवर सिंह बजवाल ने कहा कि मिनी स्विटजरलंैंड चोपता के बुग्यालों में असामाजिक लोग अपने मवेशियों को छोड़ रहे हैं। पिछले वर्ष ठंड के कारण एक दर्जन गौवंश की ठंड के कारण मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि विश्व अखाड़ा परिषद के अभियान का हिस्सा बनकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही गौवंश के संरक्षण व संवर्द्धन को लेकर एकजुटता के साथ कार्य किया जाएगा। बैठक में गौ रक्षा विभाग के कार्यों की ग्रामीणों ने प्रशंसा की और एकजुटता के साथ गौवंश के संरक्षण को लेकर कार्य करने का संकल्प लिया।
इस मौके पर गौ रक्षा विभाग के जिलाध्यक्ष रोहित डिमरी, महामंत्री विमल चैहान, सचिव देवेन्द्र बिष्ट, कोषाध्यक्ष संदीप कप्रवाण, राकेश गोस्वामी, अंकित राणा, दीपक नौटियाल, संदीप कोठारी, राहुल पटवाल, मुरली सिंह, पुष्कर सिंह पटवाल, नन्दन सिंह रावत, दिनेश नेगी, कुंवर सिंह, दिलबर सिंह नेगी, वीरेन्द्र सिंह, गीता देवी, स्मिता देवी, अनीता देवी, उषा देवी, मीना देवी, नर्वदा देवी, गौरा देवी, आशा देवी, कल्पेश्वरी देवी, सरोज देवी, विश्वेश्वरी देवी, सरस्वती देवी, मुकेश नेगी, गुड्डी देवी सहित अन्य मौजूद रहे।

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