पर्यावरण पाठशाला में छात्र – छात्राओं ने सीखे प्रकृति संरक्षण के गुर

रुद्रप्रयाग। मिश्रित वन कोट मल्ला में आयोजित पर्यावरण पाठशाला के अंतर्गत हरियाली वैली के स्कूली छात्र-छात्राओं तथा विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता एवं पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान के विभिन्न आयामों को समझा। समर कैंप के रूप में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बच्चों को जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता के महत्व से व्यावहारिक रूप से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम में पर्यावरण विशेषज्ञ देव राघवेन्द्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, जल संकट और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मिश्रित वनों की उपयोगिता, स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण, वन्यजीवों की पारिस्थितिकी में भूमिका तथा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की विशिष्टताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान विद्यार्थियों ने वन क्षेत्र का भ्रमण कर विभिन्न वृक्ष प्रजातियों, औषधीय पौधों एवं पक्षियों का अवलोकन किया और प्रकृति को निकट से समझने का अवसर प्राप्त किया।
प्रकृति के साथ भावनात्मक जुड़ाव को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में रुद्राक्ष के पौधों का रोपण कर “प्रकृति बंधन” अभियान भी चलाया गया। बच्चों ने पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया।
इस अवसर पर हरियाली देवी पवित्र वन पर शोध कर रही लखनऊ विश्वविद्यालय की शोध छात्रा माधवी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने पवित्र वनों के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पारंपरिक आस्था और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इनके संरक्षण से पर्यावरण संतुलन को मजबूत आधार मिलता है। पर्यावरण पाठशाला का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक उपायों से जोड़ना है। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सहभागिता की इच्छा व्यक्त की।
कार्यक्रम में रोहन चमोली, खुशी, महेंद्र, भरत, कान्हा, मयंक नौटियाल, माधवी सहित अनेक छात्र-छात्राएं एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं हरित भविष्य के संकल्प के साथ हुआ।



