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शिव पार्वती विवाह स्थल बना नव युगलों की पसंदीदा वेडिंग डेस्टिनेशन, जनवरी से अभी तक 100 शादियां

फाटा। रूद्रप्रयाग जनपद में स्थित शिव पार्वती विवाह स्थल आज प्रदेश ही नहीं अपितु संपूर्ण देश में नवयुगलों की शादी के बंधन में बंधने की पहली पसंद बनता जा रहा है। वर्ष भर इस पौराणिक स्थल पर बड़ी तादात में भक्त पहुंचते हैं, साथ ही नवयुगल शुभ मुहूर्त पर शादी के बंधन में बंधते हैं।
केदारघाटी के सीमांत क्षेत्र त्रियुगीनारायण में स्थित शिव पार्वती विवाह स्थल आज वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रचलित हैं। ” मान्यता है कि भगवान शिव ओर माता पार्वती ने इस पवित्र स्थान में अखंड अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए थे। इस अग्नि को धनंजय अग्नि नाम से पुकारा जाता है । इस विवाह के साक्षी भगवान विष्णु भी बने थे। यह मंदिर भगवान विष्णु के वामन अवतार के रूप में पूजे जाते हैं। इस स्थान पर वर्ष पर्यंत शुभमुहूर्त पर नव युगल शादी के बंधन में बंधते हैं।
आज संपूर्ण देश में शादी के बंधन में बंधने की शिव पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर पहली पसंद बन रहा है। इस स्थान पर देश के प्रत्येक राज्य से वर्ष भर नव युगल पहुंच रहे हैं। इस स्थान पर शुभ मुहूर्त में ही शादियां सम्पन्न की जाती हैं। इस वर्ष जनवरी माह से अभी तक करीब सौ नव युगल शादी के बंधन में बंधे हैं। वहीं बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने से अभी तक 40 के लगभग शादियां सम्पन्न हुई हैं।
तीर्थपुरोहित समिति सदस्य राजेश भट्ट ने बताया कि आज देश के नव युगलों की विवाह के बंधन में बंधने की त्रियुगीनारायण मंदिर पहली पसंद बन रहा है, इस स्थान पर शुभ मुहूर्त में विवाह सम्पन्न किए जाते हैं। साथ ही का सारे भक्त शादी की सालगिरह मनाने भी पहुंचते हैं। उन्होंने कहा इस स्थान पर विवाह सम्पन्न करने से नवयुगल भगवान शिव ओर माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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