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मन्दाकिनी की आवाज का 13वें स्थापना दिवस, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने की सहभागिता

लक्ष्मण सिंह नेगी।

कलाकारों की प्रस्तुतियों और कविताओं ने बांधा समां

ऊखीमठ। क्यूंजा घाटी की सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसरोकारों की आवाज को मंच प्रदान करने वाले ‘मन्दाकिनी की आवाज सेना गढ़सारी’ का 13वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। समारोह में क्यूंजा घाटी की लोक संस्कृति, सामाजिक सरोकार और बदलते परिवेश की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में राज्य मंत्री चण्डी प्रसाद भट्ट, पूर्व विधायक मनोज रावत, उद्योगपति सुन्दर सिंह भण्डारी सहित घाटी के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और क्षेत्रीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के सामाजिक विकास में स्थानीय मंचों और संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ‘मन्दाकिनी की आवाज’ ने विगत 13 वर्षों में क्यूंजा घाटी की समस्याओं, उपलब्धियों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। वक्ताओं ने संस्था के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच समाज को अपनी जड़ों और सरोकारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्थापना दिवस समारोह में मन्दाकिनी की आवाज के श्रोताओं ने भी संस्था के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल समाचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्र की लोक संस्कृति, प्रतिभाओं और जनसमस्याओं को सामने लाने का माध्यम भी बना है। श्रोताओं ने संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने की अपेक्षा जताई।
कार्यक्रम का सांस्कृतिक पक्ष भी आकर्षण का केंद्र रहा। स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच दर्शक देर तक झूमते रहे। क्षेत्र की माटी की खुशबू और लोक संस्कृति के रंगों ने समारोह को विशिष्ट बना दिया। वहीं कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के बदलते स्वरूप पर गहरे व्यंग्य किए। बदलते सामाजिक मूल्यों, आधुनिक जीवनशैली और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, तो कई रचनाओं ने उन्हें गंभीरता से सोचने के लिए भी विवश किया। हास्य-व्यंग्य के बीच कवियों ने समाज में आ रहे बदलावों की विसंगतियों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
समारोह में क्यूंजा घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए ‘मन्दाकिनी की आवाज’ के 13 वर्षों के सफर को क्षेत्रीय जनभावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया। स्थापना दिवस समारोह ने जहां लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच दिया, वहीं क्षेत्र के सामाजिक सरोकारों को लेकर सामूहिक संवाद का अवसर भी प्रदान किया। मन्दाकिनी की आवाज अध्यक्ष चरण सिंह राणा सचिव मानवेन्द्र नेगी ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर साहित्यकार पृथ्वी सिंह केदारखण्डी, ओम प्रकाश सेमवाल, अश्विनी गौड़, ललिता रौतेला, रेखा आर्य, प्रधान शोका देवी, नरेन्द्र सिंह कण्डारी , माधव नेगी, अनीता चौधरी, भानु भट्ट, सतेश्वरी रौथाण शिवानंद नौटियाल, कवि सतपाल, उमा नेगी, पूनम रावत, पूनम बडियारी , देवी लाल भारती, मनीषा सहित जनप्रतिनिधि व भारी संख्या श्रोता मौजूद थे।

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