फाटा स्थित छात्रावास को कब्जामुक्त कराने की मांग, 15 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी

छात्रावास बचाओ संघर्ष समिति ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, स्थानीय बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था का दिया हवाला
फाटा (रुद्रप्रयाग)। केदारघाटी के फाटा स्थित राजकीय इंटर कालेज के छात्रावास को कथित अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। छात्रावास बचाओ संघर्ष समिति फाटा ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को ज्ञापन सौंपकर छात्रावास को तत्काल खाली करवाने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 15 नवंबर तक छात्रावास एवं उसके परिसर को कब्जामुक्त नहीं किया गया तो स्थानीय जनता व्यापक आंदोलन और आमरण अनशन शुरू करने को बाध्य होगी।
समिति की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले तीन-चार वर्षों से एक गैर सरकारी संस्था द्वारा फाटा स्थित छात्रावास पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। जिस छात्रावास का उपयोग क्षेत्र के बच्चों के पठन-पाठन एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाना था, वहां बीमार घोड़े-खच्चरों को बांधा जा रहा है। समिति का आरोप है कि संबंधित संस्था ने छात्रावास को दो महीने के लिए लिया था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद भवन खाली नहीं किया गया।
ज्ञापन में बताया गया कि छात्रावास को कब्जामुक्त कराने के लिए पूर्व में स्थानीय जनता द्वारा व्यापक आंदोलन और आमरण अनशन भी किया गया था। इसके बाद उपजिलाधिकारी ऊखीमठ एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की ओर से 21 मार्च को पत्र के माध्यम से समिति को अवगत कराया गया था कि बीमार घोड़े-खच्चरों के उपचार के लिए अन्यत्र भूमि का चयन कर लिया गया है तथा छह माह के भीतर छात्रावास खाली कर दिया जाएगा। बावजूद इसके सात माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी छात्रावास खाली नहीं किया गया है।

ग्राम प्रधान रविग्राम रामेश्वर प्रसाद जमलोकी ने बताया कि समिति ने जिलाधिकारी से मांग की है कि स्थानीय छात्र-छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित संस्था से छात्रावास को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए, ताकि भवन का उपयोग क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा एवं शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जा सके।
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 15 नवंबर तक छात्रावास और उसके परिसर को खाली नहीं कराया गया तो स्थानीय जनता के सहयोग से विशाल आंदोलन एवं आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। समिति ने इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही है।
छात्रावास बचाओ संघर्ष समिति फाटा के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपना समर्थन जताया है।



