काशी विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में यात्रा को लेकर तैयारियां तेज, रंग रोगन कार्य शुरू

ब्यूरो। गुप्तकाशी स्थित भगवान काशी विश्वनाथ मंदिर में आगामी यात्रा को लेकर मंदिर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंदिर समिति मंदिर में रंग- रोगन सहित अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।
बता दें, केदारनाथ यात्रा के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में भी बड़ी तादात में श्रद्धालु दर्शनों को पहुंचते हैं। जिसे लेकर मंदिर समिति तैयारियों में जुटी हुई है।
” मान्यता है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव जब भगवान शिव के दर्शनों को हिमालय की ओर जा रहे थे पांडवों से छिपने के लिए भगवान शिव ने बैल का रूप धारण किया और यहाँ की एक गुफा में अंतर्ध्यान (गुप्त) हो गए, जिससे इस स्थान का नाम ‘गुप्तकाशी’ पड़ा। यह एक प्राचीन मंदिर है। यह प्राचीन मंदिर केदारनाथ मंदिर के समान पत्थर से निर्मित है। मंदिर में भगवान शिव के उग्र रूप भैरव और अर्धनारीश्वर को समर्पित मंदिर हैं। वहीं, मंदिर के आगे मणिकर्णिक कुंड है, जिसे मणिकर्णिक कुंड कहा जाता है, जहाँ गंगा और यमुना की धाराएँ मिलती हैं। ”
यात्रा सीजन के दौरान बड़ी तादात में श्रद्धालु इस पवित्र स्थान पर दर्शनों को पहुंचते हैं। तथा मंदिर में पूजा अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
मंदिर प्रबंधक भगवती प्रसाद सेमवाल ने बताया कि आगामी केदारनाथ यात्रा को लेकर विश्वनाथ मंदिर में साज सज्जा सहित अन्य व्यवस्थाओं में लगे हैं। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत सभी मठ मंदिरों में रंग रोधन सहित व्यवस्थाओं का कार्य किया जा रहा है।



