रिपोर्ट/केदारघाटी
रुद्रप्रयाग/फाटा। रूद्रप्रयाग – गौरीकुण्ड नेशनल हाईवे पर फाटा – बड़ासू पैदल मार्ग 2013 की आपदा के बाद से लोकनिर्माण विभाग की अनदेखी के कारण जर्जर स्थिति में बना हुआ है। गौरीकुण्ड नेशनल हाईवे पर फाटा – बड़ासू के मध्य चंडिका धार में रोड कटिंग का मलबा कार्यदायी संस्थाओं के द्वारा सदियों पूर्व बने पैदल मार्ग पर डाला जाता रहा है। वर्तमान में मार्ग की स्थिति जर्जर बनी हुई है, जिसे देखते हुए ग्रामीण बमुश्किल यहां से आवाजाही कर पा रहे हैं।
बता दें कि, रूद्रप्रयाग – गौरीकुण्ड नेशनल हाईवे निर्माण से पूर्व केदारनाथ यात्रा पैदल मार्गो से संचालित होती थी। तथा केदारनाथ, त्रियुगीनारायण तीर्थों में दर्शन करने वाले देश – विदेश के तीर्थ यात्री इसी पैदल मार्ग से आवाजाही करते थे, तब पैदल यात्रा से लेकर वर्तमान समय तक पैदल मार्ग के रख – रखाव का जिम्मा लोक निर्माण विभाग के पास है।
पूर्व में भी सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया गया, उस दौरान भी सारा मलबा रास्ते मे डाला गया था, ग्रामीणों द्वारा पैदल मार्ग के रख – रखाव के लिए लोक निर्माण विभाग, नेशनल हाईवे सहित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत दर्ज की गयी है, मगर आज तक पैदल मार्ग का रख – रखाव न होने से ग्रामीणों व जी आई सी फाटा में अध्ययनरत बच्चों को जान – जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। पैदल मार्ग की जर्जर स्थिति होने के कारण गाँव की महिलाओं व मवेशियों का इस रास्ते जंगलों में आवाजाही करना किसी खतरे से खाली नहीं है।
गौरीकुण्ड नेशनल हाईवे निर्माण के दौरान मलवा पैदल मार्ग पर गिरने से पैदल मार्ग पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया है।बरसात के समय बच्चों व ग्रामीणों को एक दूसरे को सहारा लेकर गाड़ – गदेरो को पार करना पड़ता है।
बडा़सू गांव निवासी राज्य आन्दोलनकारी कुवर सिंह रावत ने 5 जुलाई 22 को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर फाटा बडा़सू पैदल मार्ग के रख – रखाव की मांग की है तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में उनकी शिकायत 30 अगस्त 22 को क्रमांक संख्या 363930 पर दर्ज होने के बाद भी पैदल मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जानकारी देते हुए राज्य आन्दोलनकारी कुवर सिंह रावत ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की अनदेखी तथा निर्माणाधीन रूद्रप्रयाग – गौरीकुण्ड नेशनल हाईवे का मलवा पैदल मार्ग पर गिरने से पैदल मार्ग की स्थिति जानलेवा बनी हुई है।
वहीं ग्राम प्रधान बड़ासू श्रीमती उषा देवी ने बताया कि पैदल मार्ग के रख – रखाव के लिए कई बार लोक निर्माण विभाग व नेशनल हाईवे के अधिकारियों से गुहार लगाई गयी है मगर विभाग ने कभी इस ओर ध्यान नही दिया। बताया कि पैदल मार्ग की स्थिति जानलेवा होने के कारण फाटा स्थित जी आई सी में अध्ययनरत बडा़सू के नौनिहालों एवं ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है। तथा ग्रामीण महिलाओं को जंगलों में चारा पत्ती के लिए जान हथेली पर रखकर आवागमन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पैदल मार्ग की सुध न ली गयी तो ग्रामीणों को आन्दोलन के लिए बाध्य होना पडे़गा जिसकी जिम्मेदारी शासन – प्रशासन की होगी।
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