नवरात्र विशेष : चौखम्बा की गोद में बसे मनणामाई तीर्थ की अलौकिक महिमा

रिपोर्ट / लक्ष्मण सिंह नेगी
मदानी नदी के तट पर तपस्या से जगत कल्याण की साधना
पैदल ट्रैक श्रद्धालुओं व प्रकृति प्रेमियों को करता आकर्षित
ऊखीमठ। हिमालय की ऊंची चोटियों के मध्य चौखम्बा पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित मनणामाई तीर्थ युगों से अपनी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के कारण श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मदानी नदी के पावन तट पर स्थित यह तीर्थ स्थल युगों से साधकों और तपस्वियों की साधना भूमि रहा है, जहां आज भी जगत कल्याण के लिए तपस्या की परंपरा जीवंत है। मनणामाई तीर्थ का उल्लेख स्थानीय जनश्रुतियों और पौराणिक कथाओं में विशेष महत्व के साथ मिलता है। कहा जाता है कि इस स्थल पर महान संतों और सिद्ध पुरुषों ने कठोर तप कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में भी यहां साध्वी मनणामाई द्वारा की जा रही तपस्या क्षेत्र की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ा रही है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर साध्वी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। मनणामाई तीर्थ के समीप बहने वाली मदानी नदी अपनी निर्मलता, कल-कल बहते जल और दिव्य स्वरूप के कारण विशेष आस्था का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस नदी में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। हिमालय की गोद से निकलकर बहती यह नदी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपने प्राकृतिक स्वरूप में भी अद्वितीय है। मनणामाई तीर्थ के चारों ओर फैले विशाल बुग्याल इस क्षेत्र की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। मखमली घास की हरी चादर, रंग-बिरंगे फूलों की बहार और दूर तक फैले खुले मैदान प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। बरसात के मौसम में जब ये बुग्याल पूरी तरह खिल उठते हैं, तब यहां का दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। शांत वातावरण और शुद्ध हवा यहां आने वाले हर व्यक्ति को मानसिक सुकून प्रदान करती है। शिक्षाविद रवीन्द्र भट्ट बताते हैं कि इस तीर्थ तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को एक रोमांचक पैदल ट्रैक से होकर गुजरना पड़ता है, जो अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है। घने जंगलों, झरनों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरने वाला यह ट्रैक प्राकृतिक विविधता से भरपूर है। रास्ते में पक्षियों की मधुर चहचहाहट, ठंडी हवाएं और पहाड़ों के मनोहारी दृश्य यात्रियों की थकान को दूर कर देते हैं। हालांकि यह मार्ग कुछ स्थानों पर चुनौतीपूर्ण भी है, जिससे यात्रियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। भगवती प्रसाद भट्ट का कहना है कि मनणामाई तीर्थ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। यदि इस स्थल का समुचित प्रचार-प्रसार और विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे । प्रधान संगठन ब्लॉक महामंत्री मदन भट्ट ने मांग करते हुए कहा है कि मनणामाई तीर्थ स्थल तक पहुंचने के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, जिसमें ट्रैक मार्ग का सुधार, विश्राम स्थलों की व्यवस्था और सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सकेगा।
बद्री केदार मन्दिर समिति पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत, जगत सिंह पंवार ने बताया कि मनणामाई तीर्थ, मदानी नदी की निर्मल धारा और चौखम्बा की भव्यता मिलकर एक ऐसा अद्वितीय संगम प्रस्तुत करते हैं, जहां आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच एक साथ अनुभव किया जा सकता है। यह स्थल न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि हिमालय की अनुपम सुंदरता का जीवंत उदाहरण भी है। प्रकृति प्रेमी शंकर सिंह पंवार ने बताया कि प्रकृति ने रासी – थौली – मनणामाई तीर्थ के 32 किमी पैदल ट्रैक को अपने वैभवों का भरपूर दुलार दिया है इसलिए मन में इस भूभाग में बार – बार आने लालसा बनी रहती है।



