
लक्ष्मण सिंह नेगी।
प्रति माह सावन माह में होता यात्रा का आयोजन।
ऊखीमठ। भेड़ पलकों की आराध्य देवी भगवती मनणामाई की 32 किलोमीटर लंबी पांच दिवसीय लोकजात यात्रा का राकेश्वरी मंदिर, रासी गांव से वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य शुभारंभ हो गया। यात्रा के शुभारंभ अवसर पर रासी गांव सहित मद्महेश्वर घाटी एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिला-पुरुष, युवा एवं भेड़ पालक समुदाय के लोग उपस्थित रहे। संपूर्ण क्षेत्र मां मनणामाई के जयघोष और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से भक्तिमय हो उठा।
प्रातःकाल राकेश्वरी मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना, हवन एवं देवी अनुष्ठान संपन्न होने के बाद भगवती मनणामाई की डोली को पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और जयकारों के बीच यात्रा के लिए रवाना किया गया। श्रद्धालुओं ने मां से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा, पशुधन की रक्षा तथा जनकल्याण की मंगलकामना की। डोली के प्रस्थान के समय श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पांच दिनों तक चलने वाली यह लोकजात यात्रा लगभग 32 किलोमीटर की कठिन पर्वतीय यात्रा तय करते हुए भगवती मनणामाई के पावन तपस्थल तक पहुंचेगी। यात्रा के दौरान विभिन्न पारंपरिक पड़ावों पर देवी की विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
भगवती मनणामाई को भेड़ पालक समुदाय की आराध्य देवी के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। मान्यता है कि मां की कृपा से पशुधन की रक्षा होती है, प्राकृतिक आपदाओं से संरक्षण मिलता है तथा क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में आयोजित इस लोकजात यात्रा में दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
शिक्षाविद रविन्द्र भट्ट ने बताया कि लोकजात यात्रा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को संजोने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
बद्री केदार मन्दिर समिति पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत ने बताया कि पांच दिवसीय लोक जात यात्रा के शुभारंभ अवसर पर रासी गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और ब्रह्मा बेला पर मनणामाई के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।



