उत्तराखंडगांवरुद्रप्रयाग

चोपता फलासी में आयोजित महा बन्याथ में ‘ गढ़ ईश्वरी ‘ पुस्तक का लोकार्पण

लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। तल्लानागपुर के चोपता फलासी स्थित भगवती चण्डिका की पावन तपस्थली इन दिनों भक्ति और आस्था के अद्भुत संगम का केंद्र बनी हुई है। 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित नौ दिवसीय महा बन्याथ में पूरे क्षेत्र का वातावरण वेद ऋचाओं, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान हो उठा है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के साक्षी बन रहे हैं। महा बन्याथ के दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा विधिवत यज्ञ अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में वेद मंत्रों की गूंज से सम्पूर्ण तल्लानागपुर क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालुजन यज्ञ में आहुतियां देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना कर रहे हैं। महा बन्याथ के तीसरे दिन एक विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत साहित्यकार बलदीप बर्त्वाल की पुस्तक “गढ़ ईश्वरी” का भव्य लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक का लोकार्पण स्वयं भगवती चण्डिका की दिव्य उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और अधिक बढ़ गई। उपस्थित श्रद्धालुओं और विद्वानों ने इसे एक अद्वितीय एवं अलौकिक क्षण बताया। पुस्तक “गढ़ ईश्वरी” में भगवती चण्डिका की महिमा, लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसे स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। गढ़ ईश्वरी पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर तुंगेश्वर महादेव मंदिर समिति अध्यक्ष मानवेन्द्र बर्त्वाल ने सराहनीय पहल बताया जबकि प्रधान फलासी हेमा देवी ने लेखक के प्रयासों की भूरी – भूरी प्रशंसा की । महा बन्याथ में क्षेत्रीय महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिससे वातावरण और अधिक भक्तिमय बन गया है। महा बन्याथ के तीसरे दिन कोल्लू भन्नू निवासी रघुवीर सिंह सजवाण, श्रीमती उमा सजवाण द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्थाएं की गई हैं।
मन्दिर समिति प्रबंधक कल्याण सिंह नेगी का कहना है कि 25 वर्षों बाद इस तरह का भव्य आयोजन क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहा है। इससे युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आस्था से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि समापन दिवस तक इस महा बन्याथ में और अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर तल्लानागपुर का यह धार्मिक आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बनकर उभरा है, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का भी एक सशक्त माध्यम साबित हो रहा है। इस मौके पर समिति सचिव पूर्ण सिंह खत्री, सह सचिव मगन सिंह नेगी, उपाध्यक्ष दलवीर सिंह राणा, कोषाध्यक्ष यशवन्त सिंह नेगी, सते सिंह नेगी, मनीष मेवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य दिनेश सिंह नेगी, पण्डित जगदम्बा प्रसाद बेजवाल, त्रिलोचन भट्ट, बृजमोहन सिंह रावत, जसपाल सिंह रावत, जगवीर सिंह नेगी , भीम सिंह करासी, शम्भू प्रसाद भट्ट, सुरेन्द्र सिंह नेगी, दीपेन्द्र सिंह नेगी, रणवीर फर्स्वाण, प्रेम सिंह बर्त्वाल, शंकर सिंह नेगी, लक्ष्मण सिंह राणा, दिल्ली निवासी हरप्रीत, कंवलजीत, सतनाम सिंह सहित विभिन्न गांवों के विद्वान आचार्य, जनप्रतिनिधि व हजारों श्रद्धालु मौजूद थे।

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