केदारघाटी मनन कार्यक्रम, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने की नई दिशा

रूद्रप्रयाग। जनपद के जिला पंचायत सभागार कक्ष में आयोजित “केदारघाटी मनन कार्यक्रम” में स्थानीय आर्थिकी, स्वरोजगार, पर्यटन एवं सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं अधिकारियों ने प्रतिभाग कर केदारघाटी के समग्र विकास को लेकर अपने सुझाव साझा किए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए हैस्को के संस्थापक व पद्मश्री डाॅ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि जनपद में स्थित केदारनाथ धाम विश्व प्रसिद्ध आस्था का केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आर्थिकी और रोजगार का एक विशाल अवसर भी है। यदि योजनाबद्ध तरीके से स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों, हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक विरासत को यात्रियों तक पहुंचाया जाए तो इससे स्थानीय लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने उपस्थित उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों का आह्वान करते हुए कहा कि यात्रा अवधि के दौरान स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। उन्होंने कहा कि केदारघाटी की संस्कृति, लोककला, पारंपरिक भोजन और जैविक उत्पाद यहां की विशेष पहचान हैं, जिन्हें पर्यटन से जोड़कर बड़े बाजार तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान स्थानीय स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रसाद को बड़े स्तर पर बढ़ावा देकर महिलाओं की आर्थिकी को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित तरीके से ब्रांडिंग और विपणन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा जिससे यह हजारों परिवारों के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बन सके।
उन्होंने कहा कि केदारघाटी के पारंपरिक व्यंजन, मंडुवे और झंगोरे से बने खाद्य पदार्थ, स्थानीय मसाले एवं जैविक उत्पादों में अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की अपार संभावनाएं हैं। सरकार भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार प्रयास कर रही है।
कैबिनेट मंत्री ने जलागम विभाग के अधिकारियों को सुझाव देते हुए कहा कि जनपद की बंजर भूमि पर बड़े स्तर पर बांस का रोपण किया जाए। उन्होंने बताया कि बांस कम समय में तैयार होने वाली फसल है तथा इसे जंगली जानवरों से भी नुकसान नहीं होता। बांस आधारित उद्योगों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बांस से तैयार उत्पादों की बाजार में व्यापक मांग है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिकी को नई मजबूती मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि खाली पड़े खेतों में नेपियर घास एवं अन्य चारा प्रजातियों का उत्पादन बढ़ाया जाना चाहिए। इससे ग्रामीण महिलाओं को पशुओं के लिए चारा लेने जंगलों की ओर नहीं जाना पड़ेगा तथा गांवों के आसपास ही पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सकेगा। इससे पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा और दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि केदारघाटी में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया जा सकता है। इसके लिए विभागीय समन्वय, प्रशिक्षण, विपणन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम कठैत, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा वाचस्पति सेमवाल, ओमप्रकाश बहुगुणा, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, जिला विकास अधिकारी अनीता पंवार, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र महेश प्रकाश सहित अन्य विभागीय अधिकारी- कर्मचारी व स्थानीय उद्यमी मौजूद रहे।



