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मुनि महाराज के भक्तों ने तोड़ा अगस्त्यमुनि का गोल गेट, डीएम प्रतीक जैन बोले, धार्मिक परंपरा की आड़ में अराजकता फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

गोल गेट को तोड़ने वालों पर होगी गुंडा एक्ट में कार्यवाही,

हजारों भक्तों ने खेल मैदान में डोली के साथ किया प्रवेश,,

भक्तों का मकर संक्रांति से गेट तोड़ने का इंतजार हुआ खत्म,,

मैदान में स्थापित मुनि महाराज की गद्दीस्थल में पहुंची डोली और निशाण,,

तीन घंटे से केदारनाथ हाईवे पर लगा जाम भी खुला,, लोगों ने ली राहत की सांस,

अगस्त्यमुनि। मुनि महाराज की डोली ने हजारों भक्तों के साथ अगस्त्यमुनि मैदान में प्रवेश किया। आक्रोशित भक्तों ने गोल गेट को तोड़ दिया। इस गेट को तोड़ने में भक्तों को करीब साढ़े तीन घंटे का समय लग गया। इस दौरान आक्रोशित भीड़ की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई। प्रशासन की ओर से गेट को नहीं तोड़े जाने पर महिलाओं में खासा गुस्सा देखने को मिला।

बता दें कि केदारघाटी के अगस्त्यमुनि में प्रसिद्ध अगस्त्य मंदिर में मुनि महाराज विराजते हैं। यहां मुनि महाराज के नाम पर खेल मैदान है, जहां पर प्रशासन की ओर से स्टेडियम निर्माण करवाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण नहीं चाहते कि इस स्थान पर स्टेडियम का निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि ये खेल मैदान मुनि महाराज का है, जहां पर बच्चों को खेलने कूदने में आसानी होती है। अगर यहा स्टेडियम का निर्माण किया जाता है तो यहां के लोगों को बाहरी लोगों के हाथों की कठपुतली बनना पड़ेगा। ऐसे में स्टेडियम निर्माण के विरोध में बीते एक माह से खेल मैदान में मुनि महाराज की गद्दीस्थल के पास ग्रामीण धरने पर बैठे हुए हैं।

ग्रामीणों ने इस बार 15 साल बाद मुनि महाराज की डोली दिवारा यात्रा का आयोजन किया है, जिसके तहत मकर संक्रांति के पर्व पर अगस्त्य मंदिर से मुनि महाराज की डोली को खेल मैदान मेंं स्थित गद्दीस्थल पर जाना था। लेकिन खेल मैदान का गेट गोल आकार का होने के चलते डोली अंदर को प्रवेश नहीं कर पाई। ऐसे में ग्रामीणों ने मकर संक्रांति पर्व पर करीब पांच घंटे तक केदारनाथ हाईवे पर गोल गेट को तोड़े जाने की मांग की, मगर गेट नहीं तोड़े जाने पर डोली वापस मंदिर को लौटी। गुरूवार सुबह करीब 11 बजे डोली ने पुनः अगस्त्यमुनि खेल मैदान में अपने गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान किया। रास्ते में गोल गेट टूटा न मिलने पर मुनि महाराज के सेवक और श्रद्धालु आक्रोशित हो गए। मेन गेट तोड़ने को लेकर सवा 12 बजे के आसपास लोगों ने प्रयास शुरू किया। लगातार कई घंटे तक प्रयास के बाद लगभग चार बजे श्रद्धालु गेट तोड़ने में सफल रहे।

इसके पश्चात मुनि महाराज की डोली अपने नेजा-निशानों के साथ अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल के लिए रवाना हुई। डोली के अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान पहुंचने पर हजारों श्रद्धालु वहां एकत्र हो गए। सर्वप्रथम डोली ने स्टेडियम निर्माण स्थल पर पहुंचकर कुछ देर तक नृत्य किया। इसके बाद डोली गद्दीस्थल में विराजमान हुई, जहां मुनि महाराज के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। यहां पुजारियों ने मुनि महाराज को भोग भी लगाया।
सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि वर्ष 2004 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष के हस्ताक्षर से मुनि महाराज की भूमि को खेल विभाग को हस्तांतरित किया गया था, जिसके कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि यह भूमि पिछले करीब पांच दशकों से मुनि महाराज की रही है। चौहान ने प्रशासन से हठधर्मिता छोड़ने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि अन्यथा इससे बड़ी आपदा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

मौके पर पहुंचने पर एसडीएम एसएस सैनी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के बगल से कोई गोल गेट नहीं था और डोली संचालन समिति के पदाधिकारियों से वैकल्पिक मार्ग से जाने को कहा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित लोग मामले को अनावश्यक रूप से तूल देकर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास कर रहे हैं। एसडीएम ने कहा कि ड्रोन कैमरों के माध्यम से गेट तोड़ने वालों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, डोली के खेल मैदान में प्रवेश करने के बाद डीएम प्रतीक जैन भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं की आड़ में कुछ तथाकथित लोग राजनीति कर रहे हैं। जिन लोगों ने गेट तोड़ने का कार्य किया है, उन पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिसमें गुंडा एक्ट भी शामिल रहेगा।
धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा अथवा अव्यवस्था को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनपद के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

 

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