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हरियाली विसर्जन के साथ बीं माता कौथीग सम्पन्न

हरियाली विसर्जन के साथ बीं माता कौथीग सम्पन्न

ब्यूरो। केदारघाटी के रविग्राम में वसंत का स्वागत अनूठे अंदाज में होता आ रहा है। एक ओर बच्चे चैत्र संक्रांति से भोर होते ही घरों की देहरी पर फूल डालने की रस्म निभाते हैं। वहीं संध्या बेला पर जागर के रूप में बी माता ( विधाता ) की पूजा होती है। दरअसल, दस दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को बीं माता कौथीग के नाम से जाना जाता है। बुधवार को देर सांय हरियाली विसर्जन के साथ बीं माता कौथीग ने विराम लिया।
परंपरा अनुसार चैत्र की संक्रांति को घरों में जौ की हरियाली बोयी जाती है और शाम को प्रतिदिन उसकी पूजा होती है। दस दिन बाद शुभ मुहूर्त पर सभी लोग घरों में उगाई गई हरियाली के साथ गांव के पंचायती चौक में एकत्रित होते हैं। यहां हरियाली की पूजा की जाती है फिर उसे ग्रामीण सिर पर रख गांव के धारे ( पारंपरिक जलस्रोत) में पहुंचाते हैं। यहीं पर हरियाली को विसर्जित किया जाता है।
भगवान को अर्पित करने के बाद बाकी हरियाली को प्रसाद स्वरूप गांव में बांट दिया जाता है। शाम को यज्ञ के रूप में बीं माता की पूजा सम्पन्न होती है। गांवों में धीरे धीरे हो रहे पलायन से यह परंपरा धीरे धीरे घरों तक ही सिमटती जा रही है। गांव में कभी कोई श्रद्धालु आयोजन कर लेता है तो जागर गाए जाते हैं। आचार्य राकेश चंद्र जमलोकी एवं रामकृष्ण जमलोकी ने बताया कि बीं माता कौथीग आदि शक्ति की स्तुति का उत्सव है।एक दृष्टि से यह नंदा महोत्सव भी है।

“मान्यताओं के अनुसार पूरे कथानक के केंद्र में आदि शक्ति के साथ श्री कृष्ण हैं, इसलिए महाभारत के प्रसंग भी समाहित होते हैं। कुल मिलाकर यह सृष्टि उत्पत्ति के साथ ही द्वापर युग के इर्द गिर्द का कथानक है।”

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