जोशीमठ भू धंसाव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पिछले एक वर्ष से जमीन धंसने के संकेत मिल रहे थे, लेकिन इसकी अनदेखी के कारण आज जमीन धंसने से 600 से अधिक मकान प्रभावित हो गए हैं। मकानों में दरारें आ गई है।
जोशीमठ भू धंसाव को लेकर ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल की है। उन्होंने जोशीमठ में हो रहे भू धंसाव पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ज्योतिर्मठ भी इसकी चपेट में आ रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से भू धंसाव से प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत पहुंचाने और उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक सांस्कृतिक नगर जोशीमठ खतरे में है 1 सप्ताह से जमीन धंसने से 600 से अधिक मकान प्रभावित हुए हैं। मकानों में दरारें आ गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हिमालय में जो कुछ हो रहा है, उसको लेकर लंबे समय से चिंता व्यक्त की जा रही थी। इसकी हमेशा से अनदेखी होती रही है, जिस से आज इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। जमीन धंसने को लेकर अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सही कारण का पता लगाना चाहिए। साथ ही अतिशीघ्र प्रभावितों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
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