उत्तराखंडखास खबरेंफटाफट ख़बरेंराजनीतिराष्ट्रीय

बीकेटीसी पर गंभीर आरोप : नेताओं, रिश्तेदारों और अफसरों की खातिरदारी में बहाया गया श्रद्धालुओं का चढ़ावा

रूद्रप्रयाग/देहरादून। बाबा केदारनाथ के भक्तों द्वारा श्रद्धा से दानपात्र में डाली गई रकम अब सवालों के घेरे में है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) पर ऐसे गंभीर आरोप लगे हैं, जिन्होंने देवभूमि की धार्मिक व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

RTI से सामने आए कथित खर्चों ने यह बहस छेड़ दी है कि आखिर बाबा के भक्तों का चढ़ावा श्रद्धालुओं की सुविधा पर खर्च हो रहा है या VIP मेहमाननवाजी पर
सबसे ज्यादा चर्चा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की पुत्री एवं भाजपा नेत्री नेहा जोशी पर हुए खर्च को लेकर हो रही है। आरोप है कि नेहा जोशी की केदारनाथ यात्रा और आवभगत पर मात्र दो दिनों में लगभग 60 हजार रुपये खर्च कर दिए गए। वहीं दूसरी ओर केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल पर लगभग 37 हजार 500 रुपये खर्च दर्शाए गए। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर BKTC ने नेताओं के बीच भी “VIP स्तर” तय कर रखा है क्या? क्या किसी को स्पेशल ट्रीटमेंट और किसी को सामान्य व्यवस्था दी जा रही थी?
मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि BKTC के मुख्य कार्याधिकारी हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक (PA) के केदारनाथ प्रवास का लगभग 23 हजार रुपये का बिल भी मंदिर समिति ने दानपात्र की राशि से चुकाया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी के प्रवास पर भी लगभग 22 हजार रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन खुलासों के बाद आम श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर हजारों श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा के दौरान मूलभूत सुविधाओं—पानी, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाओं और ठहरने की समस्याओं से जूझते हैं, वहीं दूसरी ओर VIP मेहमानों की आवभगत पर दानपात्र का पैसा खुलेआम खर्च किया जा रहा है।
RTI एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों ने पूरे मामले को और गर्मा दिया है। उन्होंने BKTC की वित्तीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर समिति को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दानपात्र की राशि किन नियमों और अधिकारों के तहत VIP मेहमाननवाजी में खर्च की गई।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बाबा केदार के दरबार में अब आम और खास का फर्क होने लगा है, क्या श्रद्धालुओं की आस्था से मिले दान का उपयोग राजनीतिक प्रभाव और VIP संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है?
अब निगाहें BKTC प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बड़ा विवाद बन सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!