आपदा पीड़ितों की समस्याएं दूर करने में सरकार नाकाम : हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर किए तीखे हमले बोले सरकार छिपा रही नाकामी
आपदा पीड़ितों की समस्याएं दूर करने में सरकार नाकाम : हरीश रावत,
केदारनाथ यात्रा को लेकर बोले पूर्व मुख्यमंत्री सरकार छिपा रही नाकामी
रुद्रप्रयाग। जनपद में पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश सरकार की नाकामियों पर कड़ा हमला किया है, उन्होंने कहा कि या तो सरकार के पास योग्य लोग नहीं है, या कोई और कारण है। अधूरे मंत्रीमंडल से चार साल निकल गए और अभी भी भी दूर-दूर तक मंत्री विस्तार होने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है। इसलिए यह सरकार दिव्यांग सरकार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पिछले महीनों में भीषण आपदाएं आई हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आपदा का एक नियम है कि जहां लोगों की मौत हुई हैं वहां एक समय बाद पुष्ट जानकारी के अनुसार लापता लोगों को मृत घोषित कर दिया जाता है और परिजनों को समुचित मुआवजा एवं उनकी क्षतिपूर्ति करने का काम किया जाता है, लेकिन इस कार्य में भी सरकार विलम्ब कर रही है। आज राज्य के अंदर हालत यह है कि जहां आपदा आई वहां लोगों का खेती, मकान, दूकान, व्यवसाय सहित कई बड़ा नुकसान हुआ है। उन्हें पुर्नवासित करने की सरकार द्वारा कोई योजना नहीं बनाई है। उन परिवारों को कैसे पुर्नवासित करें, जीवन यापन के प्रति उन्हें खड़ा करने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के दौरान आपदा में होटल, दुकान, गाड़ी, घर, मकान, घोड़ा-खच्चर, गाड़ी आदि से जुड़े लोगों को छह महीने के भीतर सहायता दी गई। आपदा प्रभावित व्यक्ति को अपने पैर पर खड़ा किया, लेकिन वर्तमान सरकार अभी तक आपदाग्रस्त परिवारों की सहायता नहीं कर पाई है। सरकार ने महज जो आपदा के मानक है उसी के अनुसार मुआवजा और अहेतुक राशि दी है। कहा कि आपदा पीड़ितों के ऋण माफ किए जाने चाहिए। यदि माफ नहीं होता है तो उन्हें राहत देने के लिए बीच का रास्ता निकालना होगा। सरकार आपदा पीड़ितों के साथ खलवाड़ कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में सरकार पात्र लोगों को सब्सडी देने में कोताही कर रही है। सब्सीडी के नाम पर कमीशन लेने का काम किया जा रहा है। कहा कि प्रदेश भर में सड़कों और अस्पतालों की हालत दयनीय है। अस्पताल में डॉक्टर नहीं है। शिक्षा की हालत सुधारने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर पद खाली पड़े हैं। आज 90 फीसदी प्रधानाचार्य के पद खाली पड़े हैं। हमारी सरकार के दौर में सौ फीसदी प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पद भरे थे। जब प्रधानाचार्य ही नहीं है तो शिक्षा का हाल क्या होगा। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल चौखुटिया जैसे हर जगह बने है। स्वास्थ्य सेवाओं में राज्य का एक एजेंडा बनाया जाना चाहिए। हमारी सरकार ने प्रदेश में सर्जिकल कैंप चलाए थे। स्वास्थ्य के क्षेत्र में धरातल पर काम करने की जरूरत है। प्रदेश भर में कानून व्यवस्था बदहाल है। कहा कि आने वाले समय के लिए कांग्रेस ने मुद्दे गढ़ लिए हैं, संगठन संघर्ष के साथ आगे बढ़ रहा है। ब्राह्मण शब्द के सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि जिसेसे यह बात आई है, उसे एक शब्द पकड़कर तूल दिया गया। आज देश और प्रदेश में एक असहशीलता का वातावरण है। विद्वेश बड़ रहा है। संर्कीणताएं बढ़ रही है। तीन तत्व को लेकर मैंने बात कही थी। एक सनातन है, दूसरा उसका व्याख्याता ब्राह्मण और तीसरा कांग्रेस। यह तीनों एक तरीके की पहचान है, लेकिन किसी ने इन तीनों में से महज एक ही शब्द पकड़क कर अपनी बात रखी। कहा कि जब भी यह तीनों ने एक दूसरे को ताकत दी है भारत और समाज में विकास हुआ है और जब ये साथ नहीं हुए तो भारत पीछे हुआ है। यह तीनों एक दूसरे के पूरक है। सनातन मूल है। केदारनाथ सोना प्रकरण को लेकर हरीश रावत ने कहा कि इसने हमारी आध्यात्मिकता पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है। इसको लेकर कांग्रेस सदा आवाज उठाएगी। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष कुंवर सजवाण, आनंद सिंह रावत, प्रदीप थपलियाल, नपं अगस्त्यमुनि अध्यक्ष राजेंद्र गोस्वामी, पूर्व जिप सदस्य गणेश तिवारी, नरेन्द्र सिंह बिष्ट, लक्ष्मण रावत, दीपक भंडारी, कमल रावत आदि मौजूद थे।



