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सोशल मीडिया पर घोड़े-खच्चर का 3 वर्ष पुराना भ्रामक वीडियो वायरल, अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 के सफल संचालन के बीच फर्जी खबरों पर प्रशासन की सख्त नजर

प्रशासन का सख्त संदेश—तथ्यों की पुष्टि करें, अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

रूद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा के सुचारु एवं व्यवस्थित संचालन हेतु जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है।

इसी क्रम में जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यात्रा से संबंधित भ्रामक, अपुष्ट एवं तथ्यहीन सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं। विशेष रूप से एक वायरल वीडियो, जिसमें एक घोड़े/खच्चर को दर्शाते हुए यात्रा मार्ग पर अस्वस्थ पशुओं के संचालन की स्थिति को लेकर भ्रामक जानकारी साझा की जा रही है, आमजन एवं श्रद्धालुओं को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

उक्त प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा के निर्देशों के क्रम में सेक्टर अधिकारी भीमबली, सेक्टर अधिकारी गौरीकुंड, पशुचिकित्सा अधिकारी लिनचोली एवं गौरीकुंड द्वारा संयुक्त रूप से विगत पूरे दिन गौरीकुंड से भीमबली एवं लिनचोली तक अभियान चलाकर वीडियो में दर्शाए गए घोड़े की खोजबीन की गई। हालांकि विस्तृत तलाश के बावजूद उक्त पशु कहीं भी नहीं पाया गया।

प्रकरण की गहन जांच के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत द्वारा वीडियो में दिख रहे घोड़े के टैग नंबर के आधार पर सत्यापन किया गया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि संबंधित पशु विगत तीन वर्षों से यात्रा हेतु पंजीकृत नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि वायरल वीडियो वर्तमान यात्रा का नहीं है। जिसे भ्रामक रूप से प्रसारित किया जा रहा है।

जिला प्रशासन इस प्रकार की भ्रामक एवं असत्य सूचनाओं का स्पष्ट रूप से खंडन करता है। यह पोस्ट पूरी तरह फर्जी है और इसका वर्तमान यात्रा से कोई संबंध नहीं है।

जिला प्रशासन समस्त नागरिकों एवं श्रद्धालुओं से अपील करता है कि किसी भी प्रकार की सूचना, फोटो या वीडियो को साझा करने से पूर्व उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें। केवल विश्वसनीय एवं प्रमाणिक स्रोतों पर ही भरोसा करें तथा अफवाहों से दूर रहें।भ्रामक सूचना का प्रसार न केवल सामाजिक भ्रम एवं अशांति उत्पन्न करता है, बल्कि ऐसा करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

 

 

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