
लक्ष्मण सिंह नेगी।
मद्महेश्वर व तुंगनाथ घाटी के गांवों का भ्रमण कर भू बैकुंठ बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी मां चामुण्डा की डोली ।
ऊखीमठ। कालीमठ घाटी की भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कल मंगलवार से भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा विधिवत शुरू होगी। इस चरण में भगवती चामुण्डा की डोली मद्महेश्वर घाटी तथा तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों का भ्रमण कर भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करेगी। इसके बाद मां की डोली भूवैकुण्ठ बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी। बद्रीनाथ धाम के दर्शन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात भगवती चामुण्डा की डोली वापस अपने क्षेत्र लौटेगी और जाल मल्ला स्थित भण्डार गृह में विराजमान होगी। भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा को लेकर कालीमठ घाटी के साथ ही मद्महेश्वर और तुंगनाथ घाटी के ग्रामीणों में विशेष उत्साह बना हुआ है। मां की डोली के आगमन को लेकर विभिन्न गांवों में तैयारियां शुरू कर ली गई हैं। ग्रामीण पारम्परिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवती का स्वागत करने के साथ ही पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करेंगे।
गांव-गांव पहुंचेगी भगवती की डोली
तृतीय चरण की दिवारा यात्रा के दौरान भगवती चामुण्डा की डोली कालीमठ , मद्महेश्वर व तुंगनाथ घाटियों के विभिन्न गांवों में पहुंचेगी। डोली के गांव में पहुंचते ही ग्रामीण ढोल-दमाऊं और पारम्परिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच भगवती का स्वागत करेंगे। श्रद्धालु मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ ही परिवार एवं क्षेत्र की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगेंगे। दिवारा यात्रा के दौरान जिन गांवों में भगवती की डोली पहुंचेगी, वहां ग्रामीणों द्वारा अपनी-अपनी परम्पराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। लंबे समय बाद अपने गांव-आंगन में आराध्य देवी की डोली के पहुंचने से ग्रामीणों में भी विशेष उत्साह देखने को मिलेगा।
दिवारा यात्रा समिति अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी ने बताया कि मद्महेश्वर घाटी का भ्रमण करने के बाद भगवती चामुण्डा की डोली तुंगनाथ घाटी की ओर प्रस्थान करेगी। तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों में भी मां का भव्य स्वागत किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीण देवी के दर्शन एवं पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। दिवारा यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारम्परिक रीति-रिवाजों की अनूठी झलक देखने को मिलेगी।
धार्मिक एवं पौराणिक परम्पराओं का होगा निर्वहन
भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा क्षेत्र की धार्मिक एवं पौराणिक परम्पराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। प्रधान त्रिलोक रावत ने बताया कि दिवारा यात्रा के दौरान देवी की डोली अपने मूल भण्डार गृह से बाहर निकलकर विभिन्न गांवों में पहुंचती हैं और अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
बताया कि दिवारा यात्रा के माध्यम से देवी और भक्तों के बीच आस्था का जीवंत संवाद स्थापित होता है। ग्रामीण अपनी आराध्य देवी के स्वागत के लिए घर-आंगन सजाते हैं और पारम्परिक पूजा-अर्चना के साथ देवी का अभिनंदन करते हैं। यात्रा के दौरान लोक संस्कृति और धार्मिक परम्पराओं का संरक्षण भी होता है। भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा भी इसी धार्मिक परम्परा का निर्वहन करते हुए विभिन्न गांवों तक पहुंचेगी। मां की डोली के साथ चलने वाले श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहेगा।
भूवैकुण्ठ बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी मां की डोली
सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश सत्कारी ने बताया कि मद्महेश्वर और तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों का भ्रमण करने के बाद भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा भूवैकुण्ठ बद्रीनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेगी। हिमालय के प्रमुख तीर्थ बद्रीनाथ धाम पहुंचना यात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव होगा। यहां भगवती चामुण्डा की डोली द्वारा भगवान बद्रीनाथ के दर्शन एवं निर्धारित धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। बताया कि बद्रीनाथ धाम में दर्शन एवं पूजा-अर्चना के बाद भगवती चामुण्डा की डोली वापस अपने क्षेत्र की ओर लौटेगी और जाल मल्ला स्थित अपने भण्डार गृह में विराजमान होगी ।
जाल मल्ला भण्डार गृह में विराजमान होंगी भगवती
बद्रीनाथ धाम से वापस लौटने के बाद भगवती चामुण्डा की डोली जाल मल्ला पहुंचेगी। यहां श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों द्वारा मां की डोली का पारम्परिक रीति-रिवाजों और धार्मिक विधि-विधान के साथ स्वागत किया जाएगा। इसके पश्चात भगवती चामुण्डा अपने भण्डार गृह जाल मल्ला में विराजमान होंगी।



