गुलदार ने 13 वर्षीय बच्चे को बनाया अपना शिकार, दहशत में ग्रामीण

टिहरी। उत्तराखंड में गुलदार के आतंक से पर्वतीय जिलों में लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। अधिकतर मामलों में देखा गया है कि गुलदारों ने सबसे ज्यादा शिकार महिलाओं और बच्चों को ही बनाया है। आंकड़ों पर गौर करें तो गुलदार के हमले में 70 प्रतिशत महिलाएं और बच्चें हैं। बावजूद इसके वन विभाग गुलदार के हमलों को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है। यही कारण है कि गुलदार के हमले नहीं थम रहे हैं।
बता दें कि टिहरी के भिलंगना ब्लॉक में के केमर पट्टी के मयकोट गांव में बीती रात को घात लगाकर बैठे गुलदार ने गांव के पास अपने दोस्तों के साथ खेलकर घर लौट रहे थे 13 साल के अरनव चंद पुत्र रणवीर चंद पर हमला कर दिया। गुलदार के हमले से आरनव की मौत हो गई। घटना रविवार सांय 6 बजे के करीब की है। अंधेरा होने के कारण वन विभाग व राजस्व विभाग के संयुक्त सर्च आप्रेशन के बाद मृतक बालक का शव घर से एक किमी दूर जंगल में रात्रि 2 बजे को झाड़ियों से बरामद हुआ।
घटना के बाद से ग्रामीणों व आसपास के लोगों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश बना हुआ है। वन रेंज अधिकारी प्रदीप चौहान ने बताया कि बालक बीती शाम से गायब चल रहा था। मयकोट गांव में जिस रास्ते से वह आ रहा था, वहां झाड़ियां जमी हैं। संभव है कि वहीं घात लगाकर गुलदार ने घटना को अंजाम दिया होगा। गांव में पिंजरा और गस्ती दल तैनात किया है।



