
कालीमठ पंचगाईं ने उठाई हक-हकूकधारियों के अधिकारों की आवाज
बीकेटीसी में स्थायी प्रतिनिधित्व समेत 12 सूत्रीय मांगें, मां कालीमाई की देवरा यात्रा को भव्य स्वरूप देने की मांग
फाटा ( रूद्रप्रयाग)। कालीमठ मंदिर समूह से जुड़े पंचगाईं क्षेत्र के हक-हकूकधारी निवासियों ने अपने पारंपरिक अधिकारों, मंदिर प्रबंधन में सहभागिता और मां कालीमाई की देवरा यात्रा को भव्य स्वरूप देने की मांग उठाई है। इस संबंध में कालीमठ पंचगाईं समिति ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्य श्री प्रह्लाद पुष्पाण के माध्यम से एक पत्र भेजकर 12 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।
समिति अध्यक्ष लखपत राणा का कहना है कि पंचगाईं के हक-हकूकधारी निवासी सदियों से कालीमठ, कालीशिला एवं संबद्ध मंदिरों की तन-मन-धन से सेवा, संरक्षण और संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। इन पारंपरिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप हक-हकूकों को बनाए रखना आवश्यक है।
समिति ने कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र से बीकेटीसी में एक सदस्य का स्थायी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समिति के अनुसार कालीमठ क्षेत्र के लोगों ने मंदिरों की सेवा में लंबे समय से समर्पण और त्याग किया है, इसलिए मंदिर समिति में उनकी प्रभावी भागीदारी जरूरी है।
निर्णयों और बैठकों में सहभागिता की मांग
मंदिरों से संबंधित नीतिगत निर्णय, कार्यकारिणी अथवा उपसमिति की बैठकों में पंचगाईं समिति को उचित प्रतिनिधित्व देने के साथ ही मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले समिति से औपचारिक परामर्श की प्रक्रिया स्थापित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा कालीमठ मंदिर परिसर में पंचगाईं समिति के सुचारू संचालन के लिए बीकेटीसी की ओर से एक कक्ष कार्यालय के रूप में उपलब्ध कराने की मांग भी पत्र में रखी गई है। धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक सार्वजनिक कार्यक्रमों में समिति के सदस्यों व पदाधिकारियों की आधिकारिक सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
पारंपरिक अधिकारों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण पर जोर
समिति ने कालीमठ, कालीशिला, ऊखीमठ, जोशीमठ, बदरीनाथ सहित बीकेटीसी के अधीन मंदिरों में होने वाले वार्षिक एवं मौसमी उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों में पंचगाईं की पारंपरिक भूमिका को मान्यता देने की मांग की है। साथ ही ऐतिहासिक दस्तावेजों, समझौतों एवं अभिलेखों को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक उनकी जानकारी और मान्यता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
मां कालीमाई की दिव्य देवरा यात्रा को विशेष रूप से भव्य स्वरूप देने की मांग की गई है। समिति के अनुसार मां कालीमाई की यह यात्रा करीब चार वर्ष के अंतराल में आयोजित होती है और इससे क्षेत्र की सदियों पुरानी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा जुड़ी हुई है। समिति ने बीकेटीसी से इस यात्रा को व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठित करने और इससे जुड़े कार्यक्रमों में सहयोग करने का आग्रह किया है।
साथ ही देवरा यात्रा के सफल संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रतिवर्ष बजट प्रावधान किए जाने की मांग की गई है, ताकि यात्रा के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित हो सकें।
समिति ने वर्ष 2026 में श्री केदारनाथ धाम तथा वर्ष 2027 में श्री बदरीनाथ धाम में प्रस्तावित मां कालीमाई की दिव्य यात्रा के दौरान उचित स्वागत एवं प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि यह सामान्य यात्रा नहीं, बल्कि भगवान श्री केदारनाथ की अधिष्ठात्री दिव्य शक्ति मां काली की यात्रा है, इसलिए इसे उसी अनुरूप सम्मान एवं प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
दर्शन, रोजगार और व्यवसाय में प्राथमिकता की मांग
बीकेटीसी के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र के निवासियों को दर्शन, रोजगार एवं व्यवसाय के अवसरों में प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है। समिति ने यह भी कहा कि मंदिर में ड्यूटी, कर्तव्य या दायित्व का निर्वहन करते समय किसी हक-हकूकधारी की मृत्यु अथवा दुर्घटना होने पर उसे या उसके परिवार को क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया जाना चाहिए।
समिति ने कहा कि इन मांगों पर सकारात्मक और शीघ्र विचार कर पंचगाईं समिति के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक आयोजित की जाए। पत्र में कहा गया है कि हक-हकूकधारी निवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा और दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से ही क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को मजबूती मिलेगी। समिति ने उम्मीद जताई कि आपसी संवाद से समस्याओं का समाधान होगा और पंचगाईं जनता को आंदोलन या धरना-प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।



