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तीन दशक बीत जाने के बाद भी नहीं हो पाया मदमहेश्वर घाटी के बुरुवा गांव का विस्थापन

लक्ष्मण सिंह नेगी

ऊखीमठ। 18 अगस्त 1998 को मदमहेश्वर घाटी मे हुए भारी भूस्खलन से खतरे की जद मे आये बुरूवा गांव का 28 वर्षो बाद भी विस्थापन नहीं हो पाया है। ग्रामीणों को विस्थापन की राह निहारते – निहारते तीन दशक का समय बीत चुका है। 28 वर्षो बाद भी ग्रामीण विस्थापन की आंस लगाये बैठे हुए है तथा बरसात के समय ग्रामीणो की रातो की नीद हराम होना आम बात बनी हुई है। बुरूवा गांव वर्तमान समय मे यातायात से जुड तो गया है मगर प्रकृति का कहर कभी भी ग्रामीणो पर बरस सकता है।

बता दे, कि 18 अगस्त 1998 को मदमहेश्वर घाटी के बुरूवा भेटी मे भारी भूस्खलन होने से भेटी तोक के दर्जनो परिवार व मकाने मलवे मे जिन्दा दफन हो गये थे। बुरूवा भेटी सहित विभिन्न गांवो मे भारी भूस्खलन होने से 105 ग्रामीण, लगभग 1500 मवेशी काल के ग्रास मे समा गये थे सैकड़ो ग्रामीण बेघर हो गये थे। बुरूवा भेटी के मध्य मधु गंगा मे चार किमी की परिधि वाली झील बनने से हरिद्वार तक अलर्ट किया गया था। करीबन 24 घन्टे बाद चार किमी परिधि वाली झील का रिसाव होने से आपदा प्रभावितो व प्रशासन ने राहत की सांस ली थी। आपदा के बाद भूवैज्ञानिको ने आपदा प्रभावित क्षेत्रो का भूगर्भीय सर्वेक्षण कर मदमहेश्वर घाटी के बुरूवा गांव सहित आधा दर्जन गांवो को जोन पांच मे घोषित कर शीध्र विस्थापन करने की सलाह दी थी। आपदा के बाद ग्रामीणो द्वारा समय – समय पर बुरूवा गांव सहित खतरे की जद मे आये गांवो को विस्थापन करने की आवाज उठती रही मगर आपदा के 28 वर्षो बाद भी ग्रामीणो की विस्थापन की मांग सरकारी हुक्मरानो की फाइलो मे कैद रहने से आपदा प्रभावितो ने चुप्पी साधने मे भलाई समझी। बुरूवा गांव के नवनिर्वाचित प्रधान मदन भट्ट ने बताया कि आसमान मे बादल छाने से प्रकृति का वो खौफनाक मंजर आज भी आपदा प्रभावितो के जेहन मे घूमता है तथा आपदा के समय ही भूवैज्ञानिक ने बुरूवा गांव को जोन पांच मे घोषित कर दिया था । बुरूवा गांव के जोन पांच मे घोषित होने के बाद शासन – प्रशासन स्तर से विस्थापन की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रति परिवार 25 हजार के चैक देकर इतिश्री की गयी थी मगर 28 वर्षो बाद भी बुरूवा गांव का विस्थापन नही हुआ है। उन्होने कहा कि यदि भविष्य मे कोई घटना घटित होती है तो 28 वर्ष पूर्व के भूवैज्ञानिक की रिपोर्ट के आधार पर शासन प्रशासन को दोषी माना जायेगा । वन पंचायत सदस्य बलवीर भट्ट, नव युवक मंगल दल अध्यक्ष रघुवीर सिंह नेगी , महिला मंगल दल अध्यक्ष चन्द्रकला देवी का कहना है कि शासन – प्रशासन की अनदेखी के कारण अब हमने विस्थापन की आश छोड दी है मगर भूवैज्ञानिक की सर्वे रिपोर्ट के बाद भी बुरूवा गांव का विस्थापन न होना शासन – प्रशासन की दोहरी नीति को दर्शाता है।

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