भेड़पालको ने धूमधाम से मनाया दाती त्यौहार, 12 हजार फीट की ऊंचाई वाले बुग्याल क्षेत्र में मनाया गया त्यौहार

लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। ग्रीष्मकाल के 6 माह हिमालय की तलहटी मे बसे सुरम्य मखमली बुग्यालो मे प्रवास करने वाले भेड़पालको का दाती त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। दाती त्यौहार प्रति वर्ष रक्षाबंधन के निकट कुल पुरोहित द्वारा घोषित तिथि पर मनाया जाता है तथा दाती त्यौहार के दिन देवी – देवताओ की विशेष पूजा – अर्चना के बाद भेड – बकरियो के सेनापति नियुक्ति की परम्परा युगो पूर्व की है। दाती त्यौहार प्रति वर्ष पवाली कांठा, खाम , कुलवाणी ,थौली , नन्दीकुण्ड, पाण्डव सेरा , विसुणीताल तथा टिगरी के बुग्यालो सहित लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई वाले भूभाग मे मनाया जाता है । इस वर्ष दाती त्यौहार 6 व सात अगस्त को परम्परानुसार धूमधाम से मनाया गया । जानकारी देते हुए कई दशको से विसुणीताल ताल के निकट ग्रीष्मकाल के 6 माह प्रवास करने वाले भेड़पालक बीरेन्द्र सिंह धिरवाण ने बताया कि भेड़पालको का दाती त्यौहार धूमधाम से मनाया गया तथा इस वर्ष रक्षाबंधन का त्यौहार का पर्व जल्दी आने से दाती त्यौहार अगस्त माह के प्रथम सप्ताह मे मनाया गया।
उन्होने बताया कि दाती त्यौहार के दिन भेड़पालको द्वारा वन देवियो , क्षेत्रपाल, सिद्धवा – विद्धवा सहित पंचनाम देवी – देवताओ की पूजा – अर्चना के बाद भेड़ – बकरियो के सेनापति की नियुक्त की गयी। उन्होने बताया कि भेड – बकरियो के झुंड मे युद्ध होता है तथा विजेता भेड़ – बकरी को सेनापति के पद पर सुशोभित किया जाता है। टिगरी के बुग्यालो मे प्रवास करने वाले भेड़पालक प्रेम भट्ट ने बताया कि दाती त्यौहार बुग्यालो मे मनाने की परम्परा युगो पूर्व की है तथा दाती त्यौहार से पूर्व भेड़पालको को अनुष्ठान का पालन करना होता है तथा दाती त्यौहार के दिन पूजा – अर्चना का अलग विधान है । थौली के बुग्यालो मे प्रवास करने वाले भेड़पालक इन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि ऊंचाई वाले इलाको मे किसी भी त्यौहार को मनाना बड़ा कठिन होता है फिर भी भेड़पालक अपने निजी संसाधनो से दाती त्यौहार को हर्षोल्लास से मनाते है । भेड़पालक रघुवीर सिंह नेगी ने बताया कि दाती त्यौहार पौराणिक, धार्मिक, आध्यात्मिक व वीरता का द्योतक है । मदमहेश्वर घाटी की ग्राम पंचायत बुरूवा के नवनिर्वाचित प्रधान मदन भट्ट का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार व पशुपालन विभाग दाती त्यौहार मनाने के लिए भेड़पालको को प्रोत्साहित करती है तो दाती त्यौहार भव्य रूप से मनाया जा सकता है जिससे भेड़पालन व्यवसाय मे वृद्धि होने से भेड़पालको व युवाओ के सन्मुख स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते है।



