
रुद्रप्रयाग। जनपद के घोलतीर-मरोड़ा क्षेत्र में रेलवे टनल निर्माण कार्य के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। खासतौर पर महिलाओं ने मोर्चा संभालते हुए टनल के बाहर धरना-प्रदर्शन कर कार्य रुकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग से प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन चार वर्षों से उनके पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
बद्रीनाथ हाईवे से सटे इस क्षेत्र में चल रहे टनल निर्माण के दौरान हुए नुकसान के बाद अस्थायी रूप से टिनशेड बनाए गए थे। उस समय रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने जल्द पक्के भवन बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने टनल स्थल पर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आरवीएनएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।
रेलवे श्रमिक हित संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनील रावत सहित कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि टनल निर्माण से गांव के पैदल रास्ते और शैक्षणिक संस्थान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां सिर्फ आश्वासन देने तक सीमित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल भवन निर्माण के लिए दी गई एक करोड़ रुपये की धनराशि जिला प्रशासन के पास होने के बावजूद कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर “फ्रीज जोन” का हवाला देकर निर्माण टालने का आरोप लगाया, जबकि आसपास अन्य निर्माण कार्य जारी हैं। स्थिति को देखते हुए मौके पर पहुंचे उप जिलाधिकारी एसएस सैनी ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि 10 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना धरना स्थगित कर दिया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि तय समय में काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



