बनातोली में तीन वर्षों से अधर में झूला पुल निर्माण, अस्थायी लकड़ी के पुल और ट्रॉली के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर तीर्थयात्री व ग्रामीण
लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। विश्व प्रसिद्ध द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम की यात्रा के प्रमुख आधार शिविर बनातोली में झूला पुल का निर्माण कार्य पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों और हजारों तीर्थयात्रियों को आज भी अस्थायी लकड़ी के पुल तथा ट्रॉली की रस्सी के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। बरसात के मौसम में यह व्यवस्था और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति शासन-प्रशासन के विकास और सुरक्षित यात्रा मार्ग के दावों की भी पोल खोल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण शुरू होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि शीघ्र ही सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल जाएगी, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर अस्थायी लकड़ी का पुल क्षतिग्रस्त हो जाता है, जबकि कई बार लोगों को ट्रॉली की रस्सी के सहारे नदी पार करनी पड़ती है।
मद्महेश्वर धाम आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यात्रा मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। उनका कहना है कि यदि पुल समय पर बन गया होता तो यात्रियों और स्थानीय लोगों को इस जोखिम का सामना नहीं करना पड़ता। बद्री केदार मन्दिर समिति पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत सहित मद्महेश्वर घाटी के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि मद्महेश्वर यात्रा से क्षेत्र की आर्थिकी जुड़ी हुई है और आधारभूत सुविधाओं का विकास सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए। अधूरा पुल न केवल ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पर्यटन और तीर्थाटन की छवि पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र पुल निर्माण पूरा नहीं कराया गया तो वे जनआंदोलन शुरू करने के लिए विवश होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कराने की मांग की है।
प्रमुख बिंदु (बॉक्स)
– तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है बनातोली का झूला पुल।
– ट्रॉली की रस्सी से हो रही आवाजाही , मोरखण्डा नदी का जल स्तर बढ़ते ही प्रति नदी में समा जाता लकड़ी का अस्थाई पुल ।
– बरसात में हर समय दुर्घटना का बना रहता है खतरा।
– हजारों तीर्थयात्रियों और स्थानीय ग्रामीणों को उठानी पड़ रही परेशानी।
– ग्रामीणों ने शीघ्र पुल निर्माण पूरा कराने की उठाई मांग।
– चेतावनी—समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो होगा जनआंदोलन।



