मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर 41वें दिन भी धरना जारी

लक्ष्मण सिंह नेगी।
तुंगनाथ-कार्तिक स्वामी तीर्थाटन को जोड़ेगा मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग ।
ऊखीमठ। मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति का मोहनखाल में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना 41वें दिन भी जारी रहा। संघर्ष समिति ने मोटर मार्ग को क्षेत्र के लिए महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ और भगवान कार्तिक स्वामी की तीर्थाटन गतिविधियों को आपस में जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पर्यटन कड़ी बताते हुए सरकार से इसके निर्माण की दिशा में शीघ्र ठोस पहल करने की मांग की। संघर्ष समिति के पदाधिकारियो ने कहा कि मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग के निर्माण से रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों को एक नए पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे तुंगनाथ धाम और कार्तिक स्वामी धाम आने वाले तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों को आवागमन का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के साथ ही दोनों जनपदों के पर्वतीय पर्यटन स्थलों को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद मिलेगी।
वक्ताओं ने कहा कि तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जबकि भगवान कार्तिक स्वामी का धाम भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दोनों तीर्थ स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने पर क्षेत्र में तीर्थाटन के साथ साहसिक, धार्मिक और प्रकृति आधारित पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।
संघर्ष समिति का कहना है कि प्रस्तावित मोटर मार्ग के निर्माण से रुद्रप्रयाग-चमोली के हिल स्टेशनों और पर्वतीय पर्यटन स्थलों को एक नए पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर होम स्टे, होटल, परिवहन, गाइड, स्थानीय उत्पादों तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। समिति ने सरकार से पर्यटन की इन संभावनाओं को देखते हुए मोटर मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर मोहनखाल से आगे बढ़ाने की मांग की।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन बेहतर सड़क संपर्क के अभाव में अनेक पर्यटन स्थल अपेक्षित रूप से विकसित नहीं हो पा रहे हैं ।मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग का निर्माण होने पर तुंगनाथ, कार्तिक स्वामी सहित रुद्रप्रयाग और चमोली के विभिन्न पर्वतीय स्थलों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की संभावना है। संघर्ष समिति ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण की मांग को लेकर 41 दिनों से धरना जारी है। इसके बावजूद अभी तक अपेक्षित कार्रवाई न होने से आंदोलनकारियों में नाराजगी है। समिति ने सरकार और शासन से मांग की कि मोटर मार्ग की उपयोगिता, धार्मिक महत्व तथा पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए निर्माण प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाया जाए।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक मोटर मार्ग निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि रुद्रप्रयाग और चमोली के पर्वतीय पर्यटन को नई पहचान दिलाने तथा तुंगनाथ-कार्तिक स्वामी तीर्थाटन को एक व्यापक पर्यटन परिपथ से जोड़ने का प्रयास है। इस मौके पर संघर्ष समिति अध्यक्ष राकेश सिंह नेगी, आशीष थपलियाल, धर्मवीर सिंह, हरीश नेगी, संजय सिंह, विनोद सिंह, कुन्दन सिंह, कुलवीर सिंह नेगी, प्रदीप, प्रकाश लाल, कल्पेश्वर चन्द्र थपलियाल, महेंन्द्र सिंह पुष्कर सिंह, धर्मेन्द्र बिष्ट सहित कई आन्दोलनकारी मौजूद रहे।



