भारी बारिश से दशज्यूला कांडई क्षेत्र के इशाला में तबाही, मकानों में घुसा मलबा,

पंचायत भवन क्षतिग्रस्त, कई परिवारों पर संकट,
रुद्रप्रयाग। जनपद के दशज्यूला क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत इशाला में बीती 24 जून की रात्रि हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। क्षेत्र में लगातार हुई वर्षा के चलते बुरसाला तोक में कई आवासीय भवनों में मलबा घुस गया, जबकि भू-धंसाव से दर्जनों खेत प्रभावित हो गए। प्राकृतिक आपदा की इस मार से ग्राम पंचायत भवन भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि भारी बारिश से धीर सिंह विष्ट, प्रेम सिंह विष्ट और सुनील सिंह विष्ट के मकानों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। उनके घरों में भारी मात्रा में मलबा घुसने के साथ भू-धंसाव से भी व्यापक क्षति हुई है। वहीं यशवीर सिंह, कुलदीप सिंह, रविंद्र खत्री और संदीप बिष्ट के मकान भी खतरे की जद में आ गए हैं, जिससे इन परिवारों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र के दर्जनों खेतों में मलबा भर जाने से किसानों की कृषि भूमि और फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
ग्राम प्रधान ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने, नुकसान का शीघ्र सर्वे कर उचित मुआवजा देने तथा पूरी तरह क्षतिग्रस्त पंचायत भवन का पुनर्निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराने की मांग की है।
इधर, जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन काण्डपाल ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नुकसान की जानकारी मिलते ही संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर शीघ्र संयुक्त सर्वे कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत एवं मुआवजा दिलाने के साथ-साथ पंचायत भवन के पुनर्निर्माण और क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा कार्यों के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी की जाएगी।
उन्होंने आश्वस्त किया कि इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रशासन से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
लगातार हो रही बारिश और बढ़ते भू-धंसाव ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कार्य, मजबूत जल निकासी व्यवस्था तथा भू-स्खलन रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जाने की मांग की है।



