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वन टाइम सेटलमेंट और समान कार्य-समान वेतन की मांग पर बीकेटीसी कर्मचारियों का धरना जारी,

ओंकारेश्वर मंदिर में आंदोलनरत कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन, सरकार से शीघ्र समाधान की मांग,

ऊखीमठ। बदरी-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अस्थायी कर्मचारियों का वन टाइम सेटलमेंट के माध्यम से नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर क्रमिक धरना जारी है। गुरुवार को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में धरना दे रहे कर्मचारियों को विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्मवान, व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट, युवा कांग्रेस रुद्रप्रयाग के पूर्व जिलाध्यक्ष कर्मवीर कुंवर, पवन राणा और दलवीर रावत धरना स्थल पर पहुंचे।

उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार और मंदिर समिति से उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। साथ ही कहा कि वर्षों से मंदिर समिति के अंतर्गत सेवाएं दे रहे अस्थायी कर्मचारियों के भविष्य और सेवा संबंधी हितों को लेकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

आंदोलनरत कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए वन टाइम सेटलमेंट की व्यवस्था लागू की जाए। इसके साथ ही समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन दिया जाए, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक पारिश्रमिक और सेवा संबंधी लाभ मिल सकें।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2024 में केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन टाइम सेटलमेंट को लेकर आश्वासन दिया था। हालांकि, मांग पूरी नहीं होने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

बीकेटीसी के अंतर्गत तुंगनाथ, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ, मां कालीमठ, केदारनाथ और बदरीनाथ सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर अस्थायी कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। आंदोलनरत कर्मचारियों की मांग है कि उनकी समस्याओं का समाधान कर सेवा संबंधी अनिश्चितता दूर की जाए।
धरना स्थल पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार तथा मंदिर समिति से कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। वहीं, आंदोलनरत कर्मचारियों की निगाहें अब सरकार और मंदिर समिति के अगले कदम पर टिकी हैं।

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