मानव वन्य जीव संघर्ष से सहमे केदारघाटी के ग्रामीण, प्रशासन से सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने की मांग
मानव वन्य जीव संघर्ष से सहमे केदारघाटी के ग्रामीण, प्रशासन से सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने की मांग
ब्यूरो। पहाड़ों में मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं कम नहीं हो पा रही हैं। जनपद में गुलदार द्वारा बालक को उठा ले जाने की घटना के बाद केदारघाटी में भी ग्रामीण सहमे हुए हैं।
दरअसल, केदारघाटी के गांवो शेरसी, बड़ासू, न्यालसू त्रियुगीनारायण में गत दिनों गुलदार के हमले में करीब दस से अधिक मवेशियों की जान गई थी। जिसके बाद वन विभाग ने गांवों में गश्त प्रारंभ किया तथा सुरक्षा को लेकर ट्रैप कैमरे एवं एनाइडर लगाए गए। वहीं कुछ दिनों बाद गांवों में गश्त एवं सुरक्षा को लेकर दिए गए आश्वासन भी नाम मात्र के रह गए। जिसे लेकर अब ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में भालू के हमले में ग्रामीण घायल हुए ,जिन पर भी वन विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया, कुछ दिनों बाद गुलदार के हमले में मवेशियों की जान चली गई। जिसे लेकर भी वन विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति कर एक दिन गश्त कर अपना पल्ला झाड़ दिया।
न्याय पंचायत क्षेत्र के गांवों में अभी भी गुलदार व भालू की धमक देखी गई है जिसे लेकर ग्रामीण चिंतित है।
ग्राम शेरसी सरपंच मोहन नौटियाल ने बताया कि गत दिनों गांव में भालू ओर गुलदार के हमले में मवेशियों की जान चली गई। जिसे लेकर वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने की बात कही थी गांव में सिर्फ ट्रैप सायरन लगा कर , गश्त भी बंद किया गया तथा ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। जबकि गांव में गश्त करने हेतु कहा गया था।
त्रियुगीनारायण निवासी राजेश भट्ट ने बताया कि गांव में गुलदार से ग्रामीण अभी भी सहमे हुए हैं देर रात्रि लोगों ने गौशाला जाने से बच रहे हैं। वन विभाग ने गांव में गुलदार के हमले के दौरान गश्त कर अपनी जिम्मेदारी समाप्त की। लेकिन मानव वन्य जीवों की घटनाओं से ग्रामीण सहमे हुए हैं उन्होंने वन कर्मियों से गांव क्षेत्र में बीच बीच में सुरक्षा को लेकर गश्त करवाने की मांग की है।
वन क्षेत्राधिकारी गुप्तकाशी शंकर सिंह रावत ने बताया कि केदारघाटी सहित अन्य क्षेत्रों में हुई गुलदार की घटनाओं को लेकर विभाग सजग है लगातार क्षेत्र में वन कर्मियों की टीम गश्त कर रही है, साथ ही सुरक्षा को लेकर सायरन व ट्रैप कैमरे भी लगाए गए थे। वहीं ग्रामीणों को सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूक भी किया जा रहा है।



