पौराणिक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए की जाए सामूहिक पहल : विनोद राणा, कालीमठ घाटी के खोन्नू गांव में हो रहा बगड़वाल नृत्य

लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। कालीमठ घाटी के ग्राम खोन्नू गाँव में 16 वर्षों बाद आयोजित बगड़वाल नृत्य में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। बगडवाल नृत्य में धियाणियो व प्रवासियों के शामिल होने से धीरे – धीरे रौनक लौटने लगी है।
12 दिवसीय बगड़वाल नृत्य में ग्रामीणों, बगडवाल पश्वाओ व नौनिहालों द्वारा विभिन्न पौराणिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं का निर्वहन किया जा रहा है।
बगडवाल नृत्य के आठवें दिन बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए जिला पंचायत सदस्य कालीमठ विनोद राणा ने कहा कि परम्परायें घटती व बढ़ती है मगर संस्कृति हमेशा समान रहती है इसलिए संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए सामूहिक पहल की जायेगी। उन्होने कालीमठ क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए जन मानस से एक मंच पर शामिल होने का आवाहन किया। विशिष्ट अतिथि क्षेत्र पंचायत सदस्य सोमेश्वरी भटट् ने कहा कि कालीमठ घाटी की अपनी विशिष्ट पहचान है इसलिए यहाँ के जनमानस द्वारा समय – समय पर अनेक प्रकार के धार्मिक आयोजन किये जाते हैं। बगड़वाल नृत्य में गजपाल सिंह, जीत सिंह सुरेन्द्र सिंह , संजय सिंह , भगत सिंह , जगदीश सिंह तथा बिक्रम सिंह के द्वारा बगडवाल पश्वाओ की भूमिका अदा की जा रही है जबकि स्थानीय वाद्य यंत्रों की थाप से खोन्नू गाँव का वातावरण गुंजायमान हो रहा है।
इस मौके पर बगड़वाल नृत्य कमेटी संरक्षक लक्ष्मण सिंह सत्कारी , अध्यक्ष दिनेश सत्कारी ,उपाध्यक्ष केदार सिंह सत्कारी , सचिव प्रताप सिंह सत्कारी , कोषाध्यक्ष प्रताप सिंह सत्कारी , पण्डित सत्यानन्द भटट् पण्डित प्रेम प्रकाश भटट् , प्रधान त्रिलोक सिंह रावत, पूर्व प्रधान सुरेन्द्र सिंह तिन्दोरी, बबली देवी नेगी, सन्दीप भटट्, महिला मंगल दल अध्यक्ष सीता देवी, प्रदीप सिंह सत्कारी, बिक्रम सिंह सत्कारी, यशवन्त सिंह सत्कारी, राजेन्द्र सिंह सत्कारी, सहित बगडवाल नृत्य के पश्वा व विभिन्न गांवों के कई सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।



