
लक्ष्मण सिंह नेगी।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों से भेड़पालकों ने गांवों की ओर लौटना किया शुरू
ऊखीमठ। केदार घाटी में मौसम के मिजाज में आए बदलाव के साथ ही हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। केदारनाथ धाम सहित उच्च हिमालयी भूभाग में बर्फबारी होने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे संपूर्ण केदार घाटी में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम के प्रतिकूल होने और कड़ाके की ठंड की दस्तक के बीच भेड़पालकों ने भी अपने पशुधन के साथ निचले इलाकों में स्थित गांवों की ओर लौटना शुरू कर दिया है।
बीते दिनों तक जहां केदार घाटी के निचले क्षेत्रों में मौसम सामान्य बना हुआ था, वहीं अब आसमान में बादलों की आवाजाही और हल्की बूंदाबांदी के बीच ठंड बढ़ने लगी है। हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी होने से पर्वतीय चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। केदारनाथ धाम और आसपास के उच्च हिमालयी भूभाग में मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में गिरावट आने के साथ ही सर्द हवाओं का असर भी बढ़ गया है। सुबह और शाम के समय ठंड का एहसास अधिक होने लगा है।
हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और तापमान में गिरावट का सीधा असर उन भेड़पालकों की दिनचर्या पर भी पड़ने लगा है, जो गर्मियों के दौरान अपने भेड़-बकरियों के साथ ऊंचाई वाले बुग्यालों और जंगलों में प्रवास करते हैं। मौसम में ठंड बढ़ने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पशुधन के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल होने के कारण भेड़पालकों ने अब धीरे-धीरे अपने गांवों की ओर लौटना शुरू कर दिया है। भेड़पालकों की यह मौसमी वापसी पर्वतीय जीवन की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत गर्मियों में पशुधन को ऊंचाई वाले चरागाहों में ले जाया जाता है और सर्दियों की शुरुआत से पहले निचले क्षेत्रों में लाया जाता है।
स्थानीय स्तर पर मौसम में आए इस बदलाव के बाद लोगों ने भी ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों का उपयोग बढ़ा दिया है।
मौसम के बदले मिजाज ने संकेत दे दिया है कि अब पर्वतीय क्षेत्रों में शीत ऋतु की आहट तेज होने लगी है। हिमालयी चोटियों पर बर्फबारी, निचले क्षेत्रों में बूंदाबांदी और तापमान में गिरावट के बीच केदार घाटी धीरे-धीरे सर्दियों की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड का असर और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।



