उत्तराखंडगांवधार्मिक

भगवती नन्दा के आगमन से भक्तिमय हुई तुंगनाथ घाटी, काण्डा, हूण्डू के बाद उषाड़ा, दैड़ा और सारी में होगा भव्य स्वागत

लक्ष्मण सिंह नेगी।

ऊखीमठ । तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में जगत कल्याण लिए तपस्यारत भगवती नन्दा के तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों में आगमन से संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। भगवती नन्दा के गांव-गांव आगमन पर श्रद्धालु पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवी का स्वागत कर रहे हैं। इस दौरान क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। भगवती नन्दा के स्वागत में आयोजित होने वाला पारंपरिक बगड़वाल नृत्य ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भगवती नन्दा की दिव्य यात्रा को लेकर तुंगनाथ घाटी के गांवों में विशेष उत्साह बना हुआ है। देवी के आगमन पर ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर अपनी लोक परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं। ढोल-दमाऊं की गूंज, पारंपरिक नृत्य और देवी के जयकारों से गांवों का वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो रहा है। श्रद्धालु भगवती नन्दा से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और विश्व कल्याण की कामना कर रहे हैं।
पूर्व से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवती नन्दा 21 अक्टूबर को उषाड़ा गांव पहुंचेगी, जबकि 22 अक्टूबर को देवी का आगमन दैड़ा गांव में होगा। इसके बाद 23 अक्टूबर को भगवती नन्दा पर्यटक गांव सारी पहुंचेगी। देवी के स्वागत और धार्मिक आयोजनों को लेकर सारी गांव में तैयारियां की जा रही हैं। 24 अक्टूबर को सारी गांव में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है। मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ स्थानीय लोकसंस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
25 अक्टूबर को भगवती नन्दा सारी गांव से भावुक क्षणों के बीच विदा होगी। देवी की विदाई के दौरान ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भावपूर्ण विदाई देंगे। इसके पश्चात भगवती नन्दा मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां पूजा-अर्चना के बाद देवी को उनके निर्धारित पूजा स्थल पर विराजमान किया जाएगा। इस धार्मिक परंपरा को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरी श्रद्धा और उत्साह बना हुआ है।

बगड़वाल नृत्य में झलक रही लोकसंस्कृति

भगवती नन्दा के आगमन पर प्रस्तुत किया जा रहा बगड़वाल नृत्य तुंगनाथ घाटी की पारंपरिक लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण आकर्षण बना हुआ है। देवी की अगवानी में ग्रामीणों की सहभागिता से जहां धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा मिल रही है, वहीं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है। ग्रामीण परंपरागत वाद्ययंत्रों और लोकनृत्य के माध्यम से अपनी प्राचीन मान्यताओं को जीवंत बनाए हुए हैं।

ग्रामीणों ने बताया धार्मिक परंपराओं का महत्व

सामाजिक कार्यकर्ता हरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि भगवती नन्दा का गांव में आगमन क्षेत्रवासियों के लिए परम सौभाग्य का अवसर है। देवी की पूजा-अर्चना और पारंपरिक स्वागत से ग्रामीणों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक पहचान को मजबूत करती है।
पूर्व सूचना अधिकारी गजपाल भट्ट के अनुसार, भगवती नन्दा के आगमन पर आयोजित बगड़वाल नृत्य तुंगनाथ घाटी की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय परंपराओं का संरक्षण होता है और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है।
नन्दा देवी मेला समिति अध्यक्ष सारी जगदीश सिंह नेगी ने बताया कि 23 – 24 अक्टूबर को सारी गांव में आयोजित होने वाला भव्य मेला क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है। भगवती नन्दा की विदाई के समय ग्रामीणों की आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन देवी के प्रति अटूट आस्था उन्हें अगले वर्ष फिर से इस पावन अवसर की प्रतीक्षा करने की प्रेरणा देती है।
वन पंचायत सरपंच देवेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि भगवती नन्दा की यह धार्मिक यात्रा तुंगनाथ घाटी की आस्था, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। देवी के आगमन से गांवों में जहां धार्मिक चेतना का संचार हो रहा है, वहीं पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने का संदेश भी मिल रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!