त्रियुगीनारायण में तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा 2 लाख 32 हजार के पार

त्रियुगीनारायण में तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा 2 लाख 32 हजार के पार
ऊखीमठ/फाटा। देवभूमि उत्तराखण्ड के केदार घाटी में स्थित विश्वविख्यात पौराणिक तीर्थ त्रियुगीनारायण धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व आमद दर्ज की जा रही है। भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध इस पावन धाम में दर्शनार्थियों का आंकड़ा 2 लाख 32 हजार के पार पहुंच गया है। चारधाम यात्रा के साथ बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु त्रियुगीनारायण पहुंचकर अखंड धूनी, प्राचीन मन्दिर तथा पौराणिक कुंडों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु की साक्षी तथा ब्रह्मा जी के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ था। विवाह के समय प्रज्ज्वलित की गई पवित्र अग्नि आज भी मन्दिर परिसर में अखंड धूनी के रूप में निरंतर प्रज्वलित है। यही कारण है कि यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के साथ नवविवाहित दंपतियों और विवाह के इच्छुक युवाओं के लिए भी विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम जाने वाले अधिकांश श्रद्धालु त्रियुगीनारायण धाम पहुंचकर भगवान शिव-पार्वती के विवाह स्थल के दर्शन को अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं। इसके अतिरिक्त यहां स्थित ब्रह्म कुंड, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और सरस्वती कुंड का धार्मिक महत्व भी श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है। मान्यता है कि इन पवित्र कुंडों में स्नान एवं पूजा-अर्चना करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या से स्थानीय होटल, होमस्टे, भोजनालय, टैक्सी संचालक, हस्तशिल्प एवं प्रसाद विक्रेताओं के व्यवसाय को नई गति मिली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन के विस्तार से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है तथा युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सड़क, पार्किंग तथा मूलभूत सुविधाओं में हुए सुधार का भी सकारात्मक प्रभाव तीर्थाटन पर दिखाई दे रहा है।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि त्रियुगीनारायण धाम केवल एक मन्दिर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैवाहिक परंपराओं और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि उस दिव्य स्थल का अनुभव भी प्राप्त करते हैं जहां शिव और शक्ति का पावन मिलन हुआ था। यही कारण है कि हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। मन्दिर समिति के प्रबन्धक बलवीर सिंह नेगी ने बताया कि 22 अप्रैल से लेकर वर्तमान समय तक 1 लाख, 11 हजार 530 पुरुष, 1 लाख 1 हजार 477 महिलाएं तथा 19 हजार 731 नौनिहालों सहित 2 लाख 32 हजार 738 तीर्थ यात्री त्रियुगीनारायण में पूजा – अर्चना व जलाभिषेक कर विश्व समृद्धि की कामना कर चुके हैं।
व्यापार संघ अध्यक्ष महेन्द्र प्रसाद सेमवाल ने राज्य सरकार से मांग की है कि तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए त्रियुगीनारायण धाम में आधारभूत सुविधाओं का और विस्तार किया जाए। साथ ही पार्किंग, पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, आवास तथा पर्यटन सुविधाओं को और सुदृढ़ कर इस पौराणिक धाम को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित किया जाए।



