आवासीय भवन भूस्खलन की चपेट में आ जाने से गौशाला में रहने को मजबूर परिवार

फाटा। केदारघाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से ग्राम पंचायत ब्यूँग़ के कोरखी निवासी गीताराम पुत्र माहेश्वर प्रसाद का आवासीय भवन भूस्खलन की चपेट में आ जाने से ढह गया है। जिस से परिजन गौशाला में रहने को मजबूर बने हुए हैं।
बता दें कि, केदारघाटी में लगातार हो रही बारिश से बीती 17 अगस्त को कोरखी निवासी गीताराम पुत्र माहेश्वर प्रसाद का आवासीय भवन भू धंसाव की जद में आ जाने से ढह गया है। उस दौरान परिजनों ने रात्रि में भागकर अपनी जान बचाई। पीड़ित गीताराम ने बताया कि आवासीय भवन केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के ऊपर स्थित है सड़क चौड़ीकरण के दौरान से ही उनके मकान पर दरारें आने लगी थी, कई बार राजमार्ग विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया लेकिन उनके द्वारा सिर्फ आश्वासन देकर पल्ला झाड़ दिया गया। बीते वर्ष जिला प्रशासन द्वारा एक लाख चौबीस हजार की सहायता राशि दी गई जिसमें बरसात के दौरान छ माह मुझे अन्यत्र स्थान पर रहने हेतु चार हजार रुपए प्रतिमाह किराया दिया गया। साथ ही मेरे द्वारा क्षतिग्रस्त मकान के आगे स्थित सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया। वहीं इस वर्ष उनका आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त आवासीय भवन भू धंसाव की चपेट में आ जाने से ढह गया। उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार के साथ अभी अपनी गौ शाला में रहने को मजबूर है।
उन्होंने बताया कि राजस्व निरीक्षक गुप्तकाशी एवं राजस्व उपनिरीक्षक ने मौके का मुआयना किया , लेकिन अभी तक उनके द्वारा रखी गई विस्थापन की मांग पर कोई अमल नहीं हो पाया है, न हीं उन्हें 17 तारीख से अभी तक कोई भी सरकारी सहायता प्रदान की गई।
ग्राम प्रधान ब्यूँग़ अनिल उनियाल ने बताया कि ग्रामीण गीताराम का आवासीय भवन बीती 17 अगस्त की बरसात में पूर्ण तह क्षतिग्रस्त हो गया है जिसकी सूचना तहसील प्रशासन को दे दी गई। उनके द्वारा मौके का मुआयना किया गया। साथ ही अन्य ग्रामीण वासवानंद जोशी एवं राजेंद्र जमलोकी के आवासीय भवन भी भू धंसाव की जद में आ गए हैं जिस से ये लोग भी भय के साए में जी रहे हैं।
ग्रामीण विष्णु दत्त जोशी ने बताया कि विगत तीन वर्षों से इस क्षेत्र में भू धंसाव हो रहा है। कई बार जिला प्रशासन एवं राजमार्ग विभाग को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत किया गया। राजमार्ग विभाग द्वारा इस स्थान पर सुरक्षा को लेकर कार्य नहीं किया गया, जिसका परिणाम ग्रामीणों को अपने आवासीय भवनों को छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीण गीताराम सेमवाल ने शासन प्रशासन से उन्हें विस्थापन देने की मांग की है।
वहीं राजस्व निरीक्षक विनोद रतूड़ी ने बताया कि मौके का मुआयना कर देखा गया कि आवासीय भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त हो गया है जिसकी जांच रिपोर्ट तहसील प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन में दे दी गई।



