बनातोली मे मोरखडा नदी पर बना लकड़ी का अस्थाई पुल नदी की तेज धाराओ मे समाया, खतरे की जद में आवागमन के लिए बनी ट्राली

लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। द्वितीय केदार मदमहेश्वर यात्रा के आधार शिविर बनातोली मे मोरखडा नदी पर लकड़ी के अस्थाई पुल के नदी की तेज धाराओ मे समाने के बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा लगाई गयी ट्राली के एक तरफ का स्तम्भ भूकटाव के कारण खतरे की जद मे आ गया है। हिमालयी क्षेत्रो मे लगातार मूसलाधार बारिश होने तथा मोरखडा नदी के जल स्तर मे निरन्तर वृद्धि होने से ग्रामीणो मे दहशत का माहौल बना हुआ है। आने वाले समय मे यदि मोरखडा नदी पर लगी ट्राली का स्तम्भ भूकटाव के कारण नदी की तेज धाराओ मे समा जाता है तो ग्रामीणो व तीर्थ यात्रियो की मुश्किले बढने के साथ मदमहेश्वर धाम की यात्रा खासी प्रभावित हो सकती है।
बुधवार को लगभग तीन दर्जन से अधिक तीर्थ यात्री ट्राली के सहारे मोरखंडा नदी को पार कर अपने गतव्यो को पहुंच गये है मगर ट्राली मे कभी भी तकनीकी खराबी आने के कारण तीर्थ यात्रियो व ग्रामीणो की जिन्दगी से बड़ा खिलवाड हो सकता है। आपदा के दो वर्षो बाद भी बनातोली मे स्थाई पुल का निर्माण तथा बनातोली यात्रा पडाव के निचले हिस्से मे सुरक्षा दिवालो का निर्माण न होने से ग्रामीण अपने को ठगा महसूस कर रहे है।
ग्रामीणो का कहना है कि एक तरफ प्रदेश सरकार मदमहेश्वर धाम को पांचवा धाम घोषित करने की कोरी घोषणाएं कर रही है दूसरी तरफ स्थाई पुल निर्माण की डी पी आर शासन की फाइलो मे कैद रहने से स्थाई पुल का निर्माण नही हो पाया है। बता दे कि मदमहेश्वर यात्रा के आधार शिविर बनातोली मे मोरखडा नदी पर 6 दशक पूर्व बने लोहे का गार्डर पुल 14 अगस्त 2023 मे मोरखडा नदी की तेज धाराओ मे समा गया था तथा जिला प्रशासन द्वारा मदमहेश्वर धाम मे फसे 350 से अधिक तीर्थ यात्रियो को हेली सेक्स्यू के माध्यम से सुरक्षित स्थानो पर पहुंचाया गया था।
लगभग एक सप्ताह बाद लोक निर्माण विभाग व गौण्डार के ग्रामीणो द्वारा मोरखंडा नदी मे लकड़ी का अस्थाई पुल तैयार कर आवाजाही शुरू तो की गयी थी मगर विगत वर्ष 26 जुलाई को मोरखंडा नदी पर बना अस्थाई पुल नदी के वेग मे समाने के बाद फिर 105 तीर्थ यात्रियो का हेली रेक्स्यू किया गया था तथा 2 अगस्त को लोक निर्माण विभाग व ग्रामीण के सहयोग से मोरखंडा नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल बना कर मदमहेश्वर धाम की यात्रा सुचारू की गयी थी। विगत दिनो मोरखंडा नदी की तेज धाराओ मे फिर लकड़ी के अस्थाई पुल के समाने से तीर्थ यात्री व ग्रामीण ट्राली की रस्सी के सहारे आवाजाही करने के लिए विवश बने हुए है। लोक निर्माण विभाग द्वारा ट्राली के संचालन के लिए दो व्यक्तियो को तैनात तो किया गया है मगर तीर्थ यात्रियो व ग्रामीणो को जान हथेली पर रखकर मोरखंडा नदी को आर – पार करना पड रहा है।
मदमहेश्वर धाम की यात्रा से लौटे अभिरत्न ने बताया की ट्राली से आवाजाही करना जोखिम भरा है तथा मोरखंडा नदी का जल स्तर उफान पर है। बनातोली के व्यापारी बीरबल बिष्ट ने बताया की ट्राली के स्तम्भ तथा बनातोली के नीचे भूस्खलन लगातार जारी है तथा ट्राली का स्तम्भ व बनातोली यात्रा पडा़वो कभी भी खतरे की जद मे आ सकता है। उनका कहना है कि रात्रि के समय मोरखंडा नदी का वेग उफान मे आने के कारण होटल स्वामी अपर बनातोली मे शरण लेने के लिए विवश बने हुए है।
बाक्स न्यूज। ग्राम पंचायत गौण्डार के निवर्तमान प्रधान बीर सिंह पंवार का कहना है कि मोरखंडा नदी पर पुल निर्माण , बनातोली व गौण्डार गांव के निचले हिस्से मे सुरक्षा दीवालो के निर्माण के लिए दो वर्षो से शासन – प्रशासन से पत्राचार किया गया है मगर शासन- प्रशासन स्तर से सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले है । उनका कहना है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा ट्राली के संचालन के लिए दो व्यक्तियो को तैनात तो किया गया है मगर ट्राली के संचालन मे भारी दिक्कतो का सामना करना पड रहा है बताया कि यदि मोरखंडा नदी के जल स्तर मे वृद्धि होती है तो ट्राली के स्तम्भ के साथ होटल ढाबो को भारी नुकसान पहुंचने की सम्भावनाओ से इनकार नही किया जा सकता है । पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य शिवानन्द पंवार का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विगत वर्ष 7 अक्टूबर को बनातोली मे मोरखंडा नदी पर लोहे के गार्डर पुल निर्माण की घोषणा की गयी थी मगर आज तक मुख्यमंत्री की घोषणा पर भी अमल नही हुआ।



