पौराणिक पांगरी मेले का हुआ शुभारंभ, झुमैलो खेल माता की करते हैं स्तुति

फाटा। केदारघाटी के नौज़्युला मैंखंडा में लगने वाले दो दिवसीय पौराणिक धार्मिक पांगरी मेले का आज से शुभारंभ हो गया है।
बैसाख की छ: ओर सात गते को हर वर्ष फाटा में मैंखंडा के पांगरी नामक स्थान पर होता है। प्रात: मां महिष मर्दनी की भोग मूर्तियां मंदिर पुजारियों के गांव धारगांव से पौराणिक वाद्य यंत्र ढोल की थाप पर कंडी में रखकर माता के मंदिर में लाई जाती हैं, जहां विद्वान आचार्यों, मंदिर पुजारी द्वारा वेद मंत्रोच्चार के साथ पूजा की जाती है तत्पश्चात माता की भोग मूर्तियां को वाद्य यंत्र ढोल की थाप पर पुजारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ पांगरी में लाई जाती हैं। जहां पर पेड़ के नीचे चबूतरे पर स्थित शिला पर मूर्तियों को रखा जाता है। दो दिनों तक इसी पौराणिक स्थान पर इनकी पूजा की जाती हैं तथा दो दिवसीय मेले में दूर क्षेत्रों से भक्त माता के दर्शन इसी स्थान पर करते हैं।
मेले को लेकर फाटा क्षेत्र के गांव मैंखंडा, खड़िया, खाट, धानी रविग्राम जामू सहित सभी गांव में उत्सव का माहौल बना रहता है। मेले को लेकर धीयानियां अपने मायके पहुंचती हैं, गांव क्षेत्र में रौनक बनी रहती है। मंदिर पुजारी देवेंद्र सेमवाल ने बताया कि वर्ष में एक बार बैसाख माह की छ ओर सात गते को माता की भोग मूर्तियां पांगरी स्थान पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ लाई जाती है। उन्होंने बताया यह परम्परा सदियों पूर्व से चली आ रही है। खड़िया निवासी वयोवृद्ध प्रताप सिंह मेहरा ने बताया कि क्षेत्र में उत्सव के रूप में पांगरी मेला मनाते हैं इसमें क्षेत्र के बुजुर्ग झुमैलो नृत्य कर लोक भाषा में माता की स्तुति जिन्हें राँसा कहा जाता है , सभी द्वारा गाए जाते हैं। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राम प्रकाश ने बताया कि पांगरी मेला क्षेत्र वासियों के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक है, मेले में सभी क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं, वहीं मेले में ग्रामीण पौराणिक झुमैलो नृत्य कर सभी का मन मोह लेते हैं।



