उत्तराखंड

केदारपुरी के रक्षक भुकुण्ड भैरवनाथ के कपाट शीतकाल के लिए हुए बन्द

केदारपुरी के रक्षक भुकुण्ड भैरवनाथ के कपाट शीतकाल के लिए हुए बन्द
रुद्रप्रयाग (केदारनाथ )।   ग्यारवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ धाम के रक्षक भगवान भैरवनाथ के कपाट शनिवार को विधि – विधान व वेद ऋचाओं के साथ शीतकाल के लिए बन्द किये गए। केदार पुरी के रक्षक भैरवनाथ के कपाट केदारनाथ धाम की तर्ज पर खोलने व बन्द होने की परम्परा प्राचीन है। भगवान भैरवनाथ के कपाट कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादषी के दिन शनिवार को मन्दिर समिति के कर्मचारियों एवं आचार्य गणों की उपस्थिति में पूजा अर्चना कर वेदमन्त्रों चार के साथ शीतकालीन छः मास के लिए बंद कर दिए गए हैं। मान्यता है कि आज से बाबा केदारनाथ की आरती मन्दिर के बाहर बंद कर दी जाती है, सिर्फ मन्दिर के अंदर ही बाबा केदार की आरती सम्पन्न होती है।
भगवान भैरवनाथ के कपाट बंद होने के अवसर पर प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग, कार्यधिकारी आर सी तिवारी, केदार सभा अध्यक्ष विनोद शुक्ला सहित भारी संख्या में तीर्थ पुरोहित एवं यात्रीगण उपस्थित रहे।
भुकुण्ड भैरवनाथ बाबा है केदारनाथ के क्षेत्रपाल
भुकुण्ड भैरवनाथ बाबा को केदारनाथ का पहला रावल माना जाता है। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल माना जाता है। बाबा केदार की पूजा से पहले केदारनाथ भुकुण्ड भैरव बाबा की पूजा किए जाने का विधान है और उसके बाद विधिविधान से केदानाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।
भैरवनाथ के कपाट खुलने के बाद होती है केदारनाथ की पूजा

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद शनिवार या फिर मंगलवार को भैरवनाथ के कपाट खोल दिए जाते हैं। भैरवनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान केदारनाथ की आरती शुरू होती है। साथ ही भगवान को भोग भी लगाया जाता है। इसी प्रकार केदारनाथ धाम के कपाट बंद करने से पहले भगवान भैरवनाथ के कपाट बंद किए जाते हैं। भैरवनाथ के कपाट खोलने या बंद करने के लिए तिथि तय नहीं की जाती है।

कपाट खुलने के बाद शनिवार या मंगलवार और कपाट बंद होने की तिथि से पहले पड़ने वाले शनिवार या मंगलवार को भैरवनाथ के कपाट खोले और बंद किए जाते हैं। केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए जब बंद होते हैं तो भगवान भैरवनाथ की भी शीतकालीन गद्दीस्थल में नित्य पूजा होती है। केदारनाथ की डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से धाम रवाना होने के पहले दिन भैरवनाथ की विशेष पूजा-अर्चना होती है। मान्यता है कि शीतकालीन गद्दीस्थल में होने वाली पूजा के बाद भैरवनाथ केदारपुरी के लिए रवाना हो जाते हैं।
केदारपुरी की रक्षा और बाबा केदार के अग्रवीर होने के नाते बाबा केदार से पहले की पूजा भैरवनाथ को दी जाती है। केदारनाथ धाम जाने वाले लाखों भक्त भैरवनाथ के दर्शन करके भी पुण्य अर्जित करते हैं। केदारनाथ धाम से डेढ़ किमी दूरी पर भैरवनाथ का मंदिर स्थित है। यहां एक शिला पर भैरव मूर्तियां हैं। नित्य यहां पुजारी द्वारा पूजा सम्पन्न की जाती है।

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