
रूद्रप्रयाग। हिंदी दिवस के अवसर पर कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल की 79वीं पुण्यतिथि पर कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल स्मृति मंच पंवालिया के तत्वावधान में उनकी कर्मभूमि पंवालिया में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और कवियों ने महान कवि के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उनकी रचनाधर्मिता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आशुतोष भंडारी ने कवि चंद्र कुँवर बर्त्वाल के जीवन परिचय के वाचन के साथ किया। उन्होंने कवि के जीवन, साहित्यिक यात्रा और हिंदी साहित्य में उनके योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि चंद्र कुँवर बर्त्वाल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति, मानवीय संवेदनाओं और पहाड़ की संस्कृति को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।
साहित्यिक गोष्ठी में मनोज बिष्ट, अखिलेश नेगी, विनोद पंवार, नरेंद्र सिंह नेगी, शिवानंद नौटियाल, प्रकाश बड़वाल सहित अन्य कवियों ने काव्य पाठ और गीतों की प्रस्तुतियां दीं। कविताओं और गीतों के माध्यम से कवियों ने हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा तथा चंद्र कुँवर बर्त्वाल की साहित्यिक विरासत को नमन किया।
कार्यक्रम के संयोजक नरेंद्र कंडारी रहे। मुख्य अतिथि के रूप में चंद्र कुँवर बर्त्वाल स्मृति न्यास मालकोटी के संयोजक गंभीर सिंह बर्त्वाल मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कलश ट्रस्ट के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार सुभाष भट्ट ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन बासुदेव सेमवाल ने किया।
इस अवसर पर डमार, भीरी, बष्टी, बीरों, मणिगुह और भटवाड़ी सहित आसपास के गांवों के संभ्रांत जन, साहित्य प्रेमी और ग्रामीण मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने चंद्र कुँवर बर्त्वाल की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके साहित्य के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।



