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आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों के संगठन की बैठक, महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने लिया भाग

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं आशा कार्यकत्री,

आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री संगठन की बैठक,

रुद्रप्रयाग। आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। इनके बिना ग्रामीणों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को सुधार पाना बहुत कठिन कार्य है। इन्हें समान कार्य का समान वेतन मिले, इसको लेकर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा जाएगा। कार्यकत्रियों को नियमित किए जाने से ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार होगा।

रुद्रप्रयाग न्यू बस अड्डे में आयोजित आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री संगठन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंची राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत ने कहा कि आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सारी समस्याएं हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति ठीक नहीं है। ग्रामीण जंगली जानवरों से परेशान हैं तो खेती बाड़ी को लेकर भी किसानों की परेशानियों को देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कही जाने वाली आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों को सम्मान जनक वेतन मिलना जरूरी है। इस मुद्दे पर महिला आयोग आगे आएगा और सरकार से आशा कार्यत्रियों को नियमित किए जाने को लेकर बात रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उपनल कर्मचारियों की सेवाओं को देखते हुए उन्हें नियमितीकरण का लाभ देने को लेकर सरकार कार्य कर रही है। इसी तरह आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को अपने हक के लिए लड़ने की जरूरत है। बिना लड़ाई के कोई भी कार्य आसान नहीं है। महिलाओं को स्वयं खड़े होना है और खुद की लड़ाई और सुरक्षा को लेकर खुद ही आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से निजात दिलाने को लेकर वन मंत्री को प्रपोजल भेजा, लेकिन इसका कोई संज्ञान नहीं लिया गया, जो बेहद चिंता का विषय है।

आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री संगठन की प्रदेश महामंत्री ललित विश्वकर्मा ने कहा कि वर्ष 2005 में आशाओं की नियुक्ति हुई, जिसका मकसद था कि मातृ और शिशु की समस्याओं का समाधान हो सके। आज के समय में स्वास्थ्य कार्यकत्री हर कार्य को कर रही हैं। धरातल पर कार्य हो रहा है, लेकिन दुख इस बात का है कि 24 घंटे वर्क लेकर लेने के बाद मानदेय ना के बराबर मिल रहा है। राज्य सरकार से यही मांग है कि आशा वर्कर को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए और एनजीओ तथा ग्राम प्रधान के कार्यों को ना कराया जाए।
आशा कार्यकत्री पुष्पा देवी ने बताया कि सरकार हमारी सुध नहीं ले रही है। नियुक्ति के दौरान शिशु और मातृ मृत्यु कम करने को लेकर सेवाएं शुरू हुई थी, मगर आज के समय में आशा वर्करों को बहुत सारे काम दे दिए गए हैं। समझ नहीं आता है कि आठवीं पास आशा वर्कर कैसे ऑनलाइन का कार्य कर पाएंगी। उन्होंने कहा कि आज सैकड़ों आशा वर्कर उम्र दराज हो गई हैं और उन्हें डर है कि वे अब कुछ समय बाद घर बैठ जाएंगी। दुख यही है सेवानिवृत्ति पर कुछ भी नहीं मिलेगा। सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति का लाखों-करोड़ों मिलता है, जबकि आशा कार्यकत्रियों को खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। वर्षों तक सेवाएं लेने के बाद भी आशा वर्करों की दुर्दशा बनी रहती है। इस दौरान बैठक में विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई।

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