
केदारनाथ। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में शीतकालीन परंपराओं का निर्वहन शुरू हो गया है। इसी क्रम में केदारपुरी के रक्षक माने जाने वाले भगवान भूकुंड भैरवनाथ के कपाट शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के साथ ही अब केदारनाथ धाम में सायंकालीन आरती भी नहीं होगी।
केदारनाथ धाम के क्षेत्ररक्षक भुकूंड भैरवनाथ जी के कपाट पूजा अर्चना पश्चात शीतकाल के लिए आज शनिवार अपराह्न 2बजकर 15 मिनट पर विधिवत रूप से बंद कर दिए गए।
इससे पहले श्री केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना, तथा भोग लगाया गया तथा श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति मुख्य कार्याधिकारी श्री केदार सभा तथा पंच पंडा समिति रूद्रपुर ने मंदिर परिसर से कपाट बंद करने हेतु श्री भैरवनाथ जी के मंदिर की ओर प्रस्थान किया।
केदारनाथ धाम के पुजारी टी गंगाधर लिंग, धर्माधिकारी औंकार शुक्ला, तीर्थ पुरोहितों ने पूजा-अर्चना संपन्न की, स्थानीय पकवानों तथा रोट का भोग लगाया। हवन यज्ञ के साथ कपाट बंद की प्रक्रिया पूरी की गयी।
श्री भैरवनाथ जी के कपाट बंद होने के साथ ही अब श्री केदारनाथ धाम के कपाट बंद की तैयारी तथा पंचमुखी डोली की पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो गयी उल्लेखनीय है कि श्री केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल हेतु बंद होंगे इससे पहले आज शनिवार को श्री भैरवनाथ जी के कपाट बंद हो गये है।
विद्वान आचार्यों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपाट बंद करने की प्रक्रिया संपन्न कराई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरवनाथ को केदारनाथ धाम का क्षेत्रपाल और रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि शीतकाल के दौरान जब केदारपुरी बर्फ की सफेद चादर से ढक जाती है, तब भगवान भैरवनाथ धाम की रक्षा करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार भूकुंट भैरवनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद करने की तिथि शनिवार या मंगलवार को निर्धारित की जाती है। कपाट बंद होने के साथ ही केदारनाथ धाम में शीतकालीन व्यवस्थाओं और परंपराओं का क्रम आगे बढ़ गया है।
इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, बीकेटीसी सदस्य विनीत पोस्ती, केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, पंच पंडा समिति अध्यक्ष अनीत शुक्ला, विनोद शुक्ला, संतोष त्रिवेदी, भैरवनाथ पश्वा अरविंद शुक्ला, विपिन जमलोकी, अंकित सेमवाल, नवीन शुक्ला, हिमांशु शुक्ला सहित श्रद्धालु एवं तीर्थपुरोहित मौजूद रहे।



