द्वितीय व तृतीय केदार की चल विग्रह डोलियों की अगुवाई भी करे आर्मी बैण्ड – ऐश्वर्या रावत ।
लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत ने 8वीं सिख रेजीमेंट के कमान अधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर तथा तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोलियों के धार्मिक यात्रा क्रम में भारतीय सेना की बैण्ड पार्टियों की सहभागिता सुनिश्चित किए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के कैलाश गमन एवं शीतकालीन गद्दी स्थल आगमन के अवसर पर सेना की बैण्ड पार्टी अगुवाई कर श्रद्धालुओं को गौरवान्वित करती है, उसी परंपरा का विस्तार अन्य केदारों तक भी किया जाना चाहिए। ज्ञापन में राज्य मंत्री ऐश्वर्या रावत ने कहा कि द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर एवं तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ उत्तराखण्ड की प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के प्रमुख केंद्र हैं। प्रत्येक वर्ष इन दोनों धामों की चल विग्रह उत्सव डोलियां विधि-विधान के साथ शीतकालीन गद्दी स्थलों से अपने हिमालय स्थित धामों के लिए प्रस्थान करती हैं तथा शीतकाल में पुनः गद्दी स्थलों पर विराजमान होती हैं। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु एवं स्थानीय लोग डोली यात्रा में शामिल होकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि भगवान केदारनाथ की भांति मद्महेश्वर एवं तुंगनाथ की डोलियों की अगुवाई भी सेना की बैण्ड पार्टियां करें तो इससे यात्रा की गरिमा और भव्यता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। साथ ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उल्लास के साथ राष्ट्रभक्ति का भी अनुपम संदेश मिलेगा। उन्होंने कहा कि सेना और देवभूमि की इस सांस्कृतिक साझेदारी से धार्मिक परंपराओं को नई पहचान मिलेगी तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा। ऐश्वर्या रावत ने कहा कि पंचकेदार की परंपरा उत्तराखण्ड की अमूल्य धरोहर है। इन धार्मिक यात्राओं को और अधिक भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं को समन्वित प्रयास करने चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 8वीं सिख रेजीमेंट इस मांग पर सकारात्मक विचार करते हुए भविष्य में मद्महेश्वर एवं तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोलियों के कैलाश गमन तथा शीतकालीन गद्दी स्थलों की यात्राओं में सेना की बैण्ड पार्टियों की सहभागिता सुनिश्चित करेगी । उन्होंने कहा कि इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा तथा उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति, सैन्य परंपरा और देव परंपरा का अद्भुत संगम देशभर में नई पहचान बनाएगा। प्रधान संगठन के पूर्व संरक्षक सन्दीप पुष्वाण एवं जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे देवभूमि की सांस्कृतिक गरिमा को और सुदृढ़ करने वाला कदम बताया है।



