मां धारी देवी को अपने मूल स्थान पर विराजमान करने की तैयारियां शुरू, आपदा के 9 वर्ष बाद मूल स्थान पर विराजमान होंगी मां धारी देवी

मां धारी देवी को अपने मूल स्थान पर विराजमान करने की तैयारियां शुरू, आपदा के 9 वर्ष बाद मूल स्थान पर विराजमान होंगी मां धारी देवी।
रूद्रप्रयाग। आपदा के 9 वर्षों बाद 28 जनवरी को प्रसिद्ध सिद्धपीठ धारी देवी अपने मूल स्थान में विराजमान होंगी। 16 जून 2013 को अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मां धारी देवी की मूर्ति को मूल स्थान से कुछ दूरी पर स्थित अलकनंदा नदी के ऊपर बनाए गए मंदिर में विराजित किया गया था।
अब 9 वर्षों के बाद मूल स्थान पर अलकनंदा नदी के 21 मीटर ऊपर मां धारी का नया मंदिर बनकर तैयार हो गया है।
28 जनवरी को विधि विधान के साथ मा धारी सहित अन्य देवी देवताओं की मूर्ति को नए मंदिर में विराजमान किया जाएगा। इन दिनों मंदिर समिति की ओर से सभी तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है।
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का निर्माण होने और 16-17 जून 2013 में केदारनाथ धाम से आई आपदा के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया था, नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद मां धारी देवी की मूर्ति को मूल स्थान से दूसरी जगह पर विराजमान किया गया। हालांकि मां के लिए जो स्थान दिया गया वह मूल स्थान से कुछ ही दूरी पर अलकनंदा नदी ऊपर दिया गया उस समय मां धारी देवी को दूसरे स्थान पर विराजमान करने के पीछे ही केदारनाथ आपदा को जोड़ा गया। आखिरकार लंबी लड़ाई और आपदा के 9 वर्षों बाद मा धारी 28 जनवरी को अपने मूल स्थान पर विराजमान होंगी। हालांकि मां धारी का पौराणिक मंदिर पहले ही जल विद्युत परियोजना के कारण अलकनंदा नदी में डूब चुका है। अब मूल स्थान के ठीक ऊपर अलकनंदा नदी में पिल्लर गाढ़ कर नए मंदिर का निर्माण किया गया है।
इन दिनों मंदिर की सजावट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 24 जनवरी से 28 जनवरी तक मंदिर में पूजा- अर्चना की जाएगी जिसके बाद 28 जनवरी को शुभ लग्न स्थान पर बनाई गई मंदिर में विराजमान किया जाएगा।



