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रुद्रप्रयाग में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे प्राकृतिक हर्बल रंग

रुद्रप्रयाग में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे प्राकृतिक हर्बल रंग एवं उत्पाद

रुद्रप्रयाग। । लोकल फॉर वोकल अभियान के अंतर्गत स्थानीय महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में जनपद रुद्रप्रयाग में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों सहित होली की मिठाई गुजिया का निर्माण किया जा रहा है।
रुद्रप्रयाग जनपद के जवाड़ी, कुमोली, मायकोटी, मेदनपुर एवं ऊखीमठ क्षेत्र के गांवों में महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल रंग तैयार कर रही हैं। इन रंगों को जनपद मुख्यालय, आसपास के स्थानीय बाजारों तथा विकास भवन सहित हिलान्स आउट लेट के माध्यम से विक्रय हेतु उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्वरोजगार का नया अवसर प्राप्त हो रहा है, वहीं रसायनयुक्त रंगों से दूर रहने का संदेश भी आमजन तक पहुँच रहा है।
महिलाओं द्वारा पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग, चुकंदर से गुलाबी एवं लाल रंग तथा गेंदा फूल से केसरिया रंग तैयार किए जा रहे हैं। इन प्राकृतिक रंगों की बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल रही है, विशेष रूप से आगामी होली पर्व को देखते हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लोकल फॉर वोकल अभियान को जनपद रुद्रप्रयाग में निरंतर सफलता मिल रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा समूह से जुड़ी महिलाओं को प्राकृतिक रंग निर्माण का प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।

प्रशिक्षण उपरांत अब महिलाएं अपने-अपने गांवों में हर्बल रंगों का निर्माण कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका सशक्त हो रही है।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अनूप कुमार, ने बताया कि प्राकृतिक रंगों के विक्रय से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी तथा यह पहल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि होली पर्व पर स्वदेशी एवं प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें।उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्राकृतिक रंग निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है। अब वे अपने गांवों में ही हर्बल रंग तैयार कर रही हैं। होली पर्व पर इन रंगों की बिक्री से महिलाओं की आजीविका और अधिक सशक्त होगी।”
हर्बल रंग बना रही संगीता ,मोनिका कप्रवाण निवासी , जवाड़ी गांव ने बताया कि हर्बल रंग बनाने से हमें घर बैठे रोजगार मिला है। लोग हमारे बनाए रंगों को पसंद कर रहे हैं और हमें अपनी मेहनत का अच्छा लाभ मिल रहा है।

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